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अब बेटियों के परिवार में आने से मायूसी नहीं खुशियां मनाई जाती है

अब बेटियों के परिवार में आने से मायूसी नहीं खुशियां मनाई जाती है

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राष्ट्रीय बालिका दिवस: चरक अस्पताल में रात 12 से सुबह 10 बजे तक गूंजी 8 बालिकाओं की किलकारी

उज्जैन।आज राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जा रहा है। बालिका दिवस पर रात 12 से सुबह 10 बजे तक चरक अस्पताल में 8 बेटियों की किलकारी गंूजी। यह सिर्फ एक अस्पताल का आंकड़ा है। जिले का आंकड़ा इससे ज्यादा का होगा। अब बेटियों के परिवार में आने से मायूसी नहीं आती है बल्कि लाड़ली के आने की खुशियां मनाई जाती है।

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सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं के कारण समाज में बदलाव आया है। लड़का और लड़की के बीच भेदभाव भी खत्म हो रहा है। लड़कियां आज हर क्षेत्र में प्रगति कर रही हैं। राष्ट्रीय बालिका दिवस पर मातृ शिशु अस्पताल चरक भवन में अक्षर विश्व ने रात 12 से सुबह 10 बजे तक के आंकड़े एकत्रित किए तो पता चला कि 10 घंटे में 8 बालिकाओं ने जन्म लिया।

इनके परिवारजन भी बेटियों के जन्म से खुश नजर आएं। चरक अस्पताल की डॉ. अनीता शर्मा ने बताया कि रात 3 बजकर 23 मिनट पर पहली बालिका ने जन्म लिया। इसके बाद करीबएक घंटे में एक बालिका ने जन्म लिया। सुबह 10 बजे तक आठ बालिकाओं ने जन्म ले लिया था।

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बदलाव की बयार…राष्ट्रीय बालिका दिवस पर शहर की कई समाजसेवी संस्थाएं आयोजन कर बालिकाओं के बचाने के संदेश के साथ ही बालक-बालिकाओं के बीच भेदभाव नहीं हो इसे लेकर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। समाज में बदलाव की बयार आई है।

राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने का उद्देश्य भी यही है कि बालक-बालिकाओं के बीच असमानता का भाव दूर हो। सरकार द्वारा भी लाड़ली लक्ष्मी सहित कई योजनाएं चलाई जा रही है। इसका भी असर हुआ अब बालिका का दुनिया में आना परिवार के लिए खुशी बना गया है।

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