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आक्रामकता सबसे अच्छी सुरक्षा हैं

बुलडोजऱ चलाने का दबाव बनाने वालों की ही फाइल निकाल ली पुलिस कप्तान ने

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सच्चे, अच्छे, ईमानदार, साहसी, कर्तव्यपरायण और संवेदनशील व्यक्तियों के लिए शायद यह कहावत बनी हैं.. आक्रामकता ही सबसे अच्छी सुरक्षा हैं यानि अटैक इज दी बेस्ट डिफेंस…।

ऐसा ही कुछ पुलिस कप्तान ने किया हैं…। उन्होंने ने कर्तव्यपरायणता के साथ संवेदनशीलता का उदाहरण दिया…। दरअसल बीते दिनों मामूली झगड़े में चाकूबाजी हो गई। इसके शिकार एक नए नवेले युवा जनप्रतिनिधि हो गए। घटना गंभीर थी।

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चाकू का वार अधिक घातक नहीं था। फिर भी मामले को बड़ा और सनसनीखेज बनाने की हर कोशिश की गई। कुछ दिन पहले ही निगम के विस्फोट से ‘पैलेस’ गंवाकर ‘शान्ति’ खो चुके पिता ने अपने नगरसेवक पुत्र को लगे चाकू के मामले में वर्दी पर दबाव-प्रभाव बनाया। प्रकरण 307 में दर्ज हुआ।

सभी को पता हैं कि प्रदेश के मुखिया ने साफ तौर पर आदेश दे रखें कि जो अपराधी है उसके मकान पर जेसीबी चला दें…बस फिर क्या था अपने घायल बेटे के हमलावरों के मकानों को तुड़वाने की ठान ली। घटना हुई और पुलिस पर हमलावरों के मकानों को तोडऩे का प्रेशर बनाया गया तब पुलिस कप्तान अवकाश पर थे। अधिकारियों ने पॉवर नहीं होने का हवाला देकर दबाव को टाल दिया..।

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पुलिस कप्तान के अवकाश से लौटने पर घायल पुत्र के पिता उनसे मिलने पहुंचे और दबाव वाला निवेदन किया की आरोपियों के मकानों पर जेसीबी चलवा दो। पुलिस कप्तान ने बात सुनने के बाद कहा… देखते हैं और क्या हो सकता हैं। मकान तोडऩे की कार्रवाई के लिए प्रकरण नियम-कायदे के दायर में आना चाहिए। गंभीर अपराध के पुख्ता प्रमाण होना चाहिए।

तभी किसी के मकान-संपत्ति को तोडऩे की अनुशंसा की जा सकती हैं… मकान तो उनके तोड़े जाते हैं जिस पर कई प्रकरण दर्ज हैं। हमें पता है किस पर कितने प्रकरण हैं, सभी का रिकॉर्ड हैं पुलिस के पास..।

आरोपियों पर तो केवल एक ही प्रकरण है वह भी धारा 188 का..। अब 307 लगी है..। पुलिस कप्तान को उनके मुखबिरों से सूचना के साथ ही शंका थी कि मामले में प्रदेश के मुखिया के समक्ष सुनाकर न्याय की गुहार की जा सकती है।

ऐसे में पुलिस कप्तान ने अटैक इज दी बेस्ट डिफेंस की पॉलिसी को फॉलो किया और उन्होंने पिता-पुत्र की पूरी जानकारी न केवल निकलवाकर रख ली, बल्कि आला अफसरों के साथ हाईलेवल को भी अवगत करा दिया।

आरोपियों के मकानों को तोडऩे की सिफारिश के लिए कथित दबाव को भी टाल दिया..। हकीकत सामने आने से मकान भी नहीं टूटे और दबाव बनाने वाले एक बार फिर शिखर से सतह पर खड़े हो गए।

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