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उज्जैन जिले में हमेशा दो दलीय संघर्ष, नागदा-खाचरौद में पार्टी से बगावत कर जीते थे गुर्जर

उज्जैन जिले में हमेशा दो दलीय संघर्ष, नागदा-खाचरौद में पार्टी से बगावत कर जीते थे गुर्जर

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कांग्रेस, जनसंघ, जपा, भाजपा के अलावा अन्य दल को केवल एक ही बार स्वीकारा

 

शैलेष व्यास|उज्जैन। विधानसभा चुनाव के नजरिये से साढे छह दशकों का इतिहास देखें तो उज्जैन जिले की किसी भी सीट से कांग्रेस, जनसंघ, जनता पार्टी,भारतीय जनता पार्टी के अलावा किसी अन्य दल के उम्मीदवार को विधायक की कुर्सी पर नहीं पहुंचाया हैं। वहीं निर्दलीय स्थिति भी लगभग ऐसी हैं। जिले में दो बार ही निर्दलीय उम्मीदवार को सफलता हाथ लगी हैं। यह संजोग हैं कि तीनों मर्तबा ऐसा एक ही विधानसभा क्षेत्र नागदा-खाचरौद में हुआ हैं।

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उज्जैन जिले की सातों विधानसभा सीटों पर अब तक के इतिहास में एक ही प्रत्याशी को अन्य दल से टिकट लेने के बाद सफलता मिली है 1957 में वीरेंद्र सिंह परवतसिंह ने हिंदू महासभा के टिकट पर चुनाव जीता था। इसी क्षेत्र से 1962 में भैरव भारतीय स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर विधायक बन चुके हैं। इसके बाद 2003 में कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय मैदान में उतरे दिलीप सिंह गुर्जर को चुनाव में सफलता मिली थी। इसके अलावा अब तक उज्जैन जिले से कोई भी निर्दलीय या कांग्रेस- बीजेपी को छोड़कर अन्य दल का प्रत्याशी विधायक नहीं बन सका है।

बसपा ने कई बार किया प्रयास

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बीते वर्षों के दौरान बसपा जब उत्तर प्रदेश में शक्तिशाली थी उसे वक्त पार्टी ने मध्य प्रदेश में अपनी जड़े मजबूत करने के अनेक प्रयास किया। लगभग हर विधानसभा चुनाव में उज्जैन जिले की सातों सीटों पर अपने प्रत्याशियों को खड़ा किया। यही नहीं मायावती, फूल सिंह बरैया (अब कांग्रेस में है) और बसपा के कई नेता चुनावी प्रचार के लिए यहां आए लेकिन पार्टी को कभी भी सफलता नहीं मिली हालांकि इस बार अब तक एक विधानसभा सीट पर पार्टी ने अपना प्रत्याशी अधिकृत तौर पर उतारा है।

2003 में अमरसिंह आए थे प्रचार करने
2003 के विधानसभा चुनाव में उज्जैन उत्तर टिकट नहीं मिलने पर कांग्रेस के विष्णु यादव ने समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी और चुनाव के पहले सपा ने उन्हें अपना बी फार्म देते हुए साइकिल चुनाव चिह्न दिया था। प्रचार के लिए समाजवादी पार्टी के नेता अमर सिंह और राज बब्बर भी उज्जैन आए थे लेकिन यादव को सफलता नहीं मिली थी।

राकांपा से कल्पना परूलेकर ने किस्मत आजमाई है
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के बैनर तले महिदपुर से कांग्रेस की कद्दावर नेता रही कल्पना परूलेकर भी किस्मत आ चुकी है, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। पार्टी ने उन्हें घड़ी चुनाव चिन्ह अधिकृत तौर पर आवंटित किया था। प्रचार के लिए प्रफुल्ल पटेल सहित कई राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता महिदपुर पहुंचे थे।

भाजशपा को एक भी सीट नहीं

वर्ष 2006 में भाजपा से निष्कासित पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने भारतीय जनशक्ति पार्टी का गठन किया। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी आरएसएस की विचारधारा का पालन करती है, लेकिन इस दल को भी बड़ी राजनीतिक सफलता नही मिल सकी। वर्ष 2008 में भाजशपा ने जिले की सभी 7 सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारे, जिनमें से एक पर भी सफलता नहीं मिली, लेकिन वर्ष 2011 में उमा भारती की भाजपा में वापसी हो गई।

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