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उज्जैन: दो माह से आरटीपीसीआर मशीन इंस्टॉल, पर किट के अभाव में चालू नहीं

कोविड से लड़ाई के अधूरे इंतजाम: संसाधन अपडेट करने की कवायद…

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चार ऑक्सीजन प्लांट में से एक बंद

उज्जैन।चीन में फैल रहे कोरोना संक्रमण को ध्यान में रखकर सतर्कता बरतने के साथ ही उपचार की सभी तैयारियां करने के निर्देश राज्य-केंद्र सरकार द्वारा दिए गए है।

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इन सभी के बीच उज्जैन में कोविड का सामना करने की तैयारियों की पड़ताल की गई। इसमें पता चला कि कोविड जांच के लिए आरटीपीसीआर मशीन इस्टॉल हुए दो माह से अधिक का समय हो चुका है,पर आवश्यक कीट के अभाव में इसे चालू ही नहीं किया जा सका है। वहीं शहर में चार ऑक्सीजन प्लांट में से एक बंद है।

आलम यह है शहर में आरटीपीसीआर के सैंपल ही नहीं लिए जा रहे हैं। जबकि कोरोना पीक के समय रोजाना ५०० सैंपल तक की जांच हो रही थी।

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खास बात यह है कि कोरोना की दूसरी लहर के बाद शहर में कोरोना की जांच के लिए एक आरटीपीसीआर मशीन दी गई थी। जो दो माह पहले माधवनगर अस्पताल में इस्टॉल की गई है।

इसका उपयोग प्रारंभ नहीं हो सका है। दरअसल इसके संचालन और उपयोग के लिए आवश्यक कीट और संसाधन ही स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है। यहीं कारण है कि आज भी आरटीपीसीआर जांच के लिए इंदौर और अन्य प्रायवेट हॉस्पिटलों पर ही निर्भर हैं।

पुलिस प्रशिक्षण शाला का ऑक्सीजन प्लांट बंद

इतना ही नहीं दूसरी लहर में ऑक्सीजन की समस्या को देखते हुए शासन ने ऑक्सीजन प्लांट लगवाए थे। इसमें से दो प्लांट माधन नगर अस्पताल, एक चरक भवन और एक पुलिस प्रशिक्षण शाला मक्सी रोड पर लगाया गया था, जो की अब बंद पड़ा है। इस तरह ४ में से १ प्लांट बंद हैं।

बच्चे कोरोना वैक्सीन से वंचित

शहर में कोविशील्ड ही नहीं है। इसके कारण करीब 40 बच्चे टीका लगवाने से वंचित रह गए हैं। इतना ही नहीं शहर में अभी तक 12 साल से लेकर 14 तक 30393 बच्चों को ही कोरोना की दोनों डोज लगी है। जबकि टारगेट 78259 बच्चों का था। वहीं 15 से 17 वर्ष के 122481 बच्चों में से 72637 बच्चों को ही कोरोना की दोनों डोज लगी है।

कोविड से निपटने के लिए पूरे है इंतजाम

कोविड से निपटने के लिए पूरे इंतजाम है और अभी से व्यवस्थाएं दुरुस्त कर रहे हैं। आरटीपीसीआर की कीट और संसाधन के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। एक आक्सीजन प्लाट जो बंद है उसे भी शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा।
– डॉ. संजय शर्मा, सीएमएचओ

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