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उपशास्त्रीय एवं भक्ति संगीत में गायकी से किया मंत्रमुग्ध

स्वर-संवाद सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्था उज्जैन द्वारा संगीत रसिक श्रोताओं के लिये 24 अक्टूबर को पद्मश्री स्व. डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर की स्मृति में दिवाळी पहाट का उपशास्त्रीय एवं भक्ति संगीत का आयोजन अभिरंग नाट्यगृह, कालिदास अकादमी में हुआ। अतुल मुजुमदार ने बताया कि प्रात: 8 बजे शुरू हो कर लगभग दो घंटे चले इस कार्यक्रम में पुणे से आए किराना घराने के प्रसिद्ध कलाकार पं. संजय गरुड़ ने अपनी गायकी से श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। पं. संजय ने राग मियां की तोड़ी में विलंबित एक ताल बड़ा खय़ाल गाकर कार्यक्रम की शुरुआत की,

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फिर छोटा खय़ाल एवं उसके बाद पं. भीम सेन जोशी द्वारा गाये भजन बाजे रे मुरलिया बाजे, तीर्थ विठ्ठल-क्षेत्र विठ्ठल एवं पं. जितेंद्र अभिषेकी द्वारा गाया गीत हे सुरांनो चंद्र व्हा प्रस्तुत किये। अंत में जो भजे हरी को सदा भजन गाकर पं. संजय गरुड अपने गायन को विराम दिया। संवादिनी में डॉ. विवेक बंसोड़, तबले के साथ हितेंद्र दीक्षित, झांझ के साथ विश्वास चंदोलीकर, और हार्मोनियम के साथ अनुश्री बंसोड एवं कल्याणी सुगंधी ने संगत दी। संचालन सौ. दाक्षायणी पळशीकर ने किया।

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