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कब है योगिनी एकादशी? इस मुहूर्त में करें पूजा

हिन्दू धर्म में एकादशी तिथि का खास महत्व है. साल में कुल 24 एकादशी होती हैं. योगिनी एकादशी हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है. यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इसे विशेष रूप से पापों के नाश और मोक्ष की प्राप्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. इस साल 2 जुलाई को योगिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा. . इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से घर में सुख, सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है. योगिनी एकादशी का व्रत निर्जला एकादशी के बाद और देवशयनी एकादशी से पहले रखा जाता है.

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पूजा का शुभ मुहूर्त
माना जाता है कि शुभ मुहूर्त में पूजा करने से दोगुना फायदा होता है. योगिनी एकादशी पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 2 जुलाई को सुबह 8 बजकर 56 मिनट से शूरू होगा और दोपहर 2 बजकर 10 मिनट तक रहेगा. इस दौरान पूजा करने से लाभ मिलेगा. 3 जुलाई को योगिनी एकादशी व्रत का पारण होगा.

 

व्रत की विधि
योगिनी एकादशी व्रत की तैयारी एक दिन पहले दशमी तिथि से शुरू होती है. एकादशी के दिन सुबह नहाने के बाद भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. पूजा के दौरान भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र को फूल, धूप, दीपक अर्पित करें. पूजा में विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ है और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें.

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योगिनी एकादशी का महत्व
योगिनी एकादशी के बारे में कई धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है. माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस एकादशी का महत्व इतना अधिक है कि इसके व्रत के पुण्य के बराबर अन्य कोई व्रत नहीं माना जाता. इसे व्रत करने से व्यक्ति को पितृ दोष और ग्रह दोष से मुक्ति मिलती है.

योगिनी एकादशी व्रत पारण नियम
शास्त्रों के अनुसार, एकादशी व्रत का पारण हरि वासर समय समाप्त होने के बाद ही करना चाहिए.
एकादशी व्रत तोड़ने के लिए सबसे सही समय प्रातः काल का माना जाता है.
जो लोग एकादशी व्रत कर रहे हैं उन्हें मध्याह्न यानी दोपहर के समय व्रत का पारण नहीं करना चाहिए.
अगर सुबह ऐसा नहीं कर पाएं, तो दोपहर के बाद पारण करना चाहिए.
एकादशी व्रत पारण के समय भोजन में मूली, बैंगन, साग, मसूर दाल, लहसुन या प्याज आदि का भूलकर भी इस्तेमाल न करें.
एकादशी व्रत पारण का पारण सात्विक भोजन से करें और उस भोजन में चावल को जरूर शामिल करें.
द्वादशी के दिन एकादशी व्रत पारण के समय चावल खाना शुभ माना जाता है.

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योगिनी एकादशी व्रत कथा  

पौराणिक कथा के अनुसार स्वर्ग की अलकापुरी नामक नगरी में शिव का उपासक कुबेर नामक राजा रहता था. पूजा के लिए हेम नामक माली प्रतिदिन फूल लेकर आता था. एक दिन हेम अपनी पत्नी विशालाक्षी को मानसरोवर में स्नान करते समय देखकर कामुक हो गया है और उसके रमण करने लगा जिसके कारण माली को फूल लाने में देर हो गयी. जिसका कारण जानने पर राजा बहुत क्रोधित हो गया और राजा ने उसे श्राप दे दिया.

क्रोध में आकर राजा कुबेर ने हेम माली से कहा कि तूने काम वासना के चलते भगवान शिव का अनादर किया है. मैं तुझे श्राप देता हूं कि तू स्त्री का वियोग सहेगा और मृत्युलोक (पृथ्वी) में जाकर कुश्त रोग से ग्रसित रहेगा. कुबेर के श्राप से हेम माली का स्वर्ग से पतन हो गया और वह उसी क्षण पृथ्वी पर गिर गया. पृथ्वी लोक में आते ही उसके शरीर में कोढ़ हो गया.

वो काफी समय तक दु:ख भोगता रहा, लेकिन एक दिन वह मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम में पहुंच गया. उसे देखकर मार्कण्डेय ऋषि बोले तुमने ऐसा कौन सा पाप किया है, जिसके प्रभाव से तुम्हारी यह दुर्दशा हो गई. हेम माली ने पूरी बात उन्हें बता दी. उसकी व्यथा सुनकर ऋषि ने उसे योगिनी एकादशी का व्रत करने के लिए कहा. हेम माली ने विधिपूर्वक योगिनी एकादशी का व्रत किया. इस व्रत से हेम  कुष्ठ रोग से मुक्ति पाकर अपने पुराने रूप में आ गया और पत्नी के साथ सुखी जीवन यापन करने लगा. इस व्रत को करने से लोक और परलोक दोनों सवर जाते हैं.

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