केंद्र की राहत : रेस्टोरेंट व ढाबों में एलपीजी संकट होगा खत्म

कल से राज्यों को 20 प्रतिशत ज्यादा गैस मिलेगी, प्रवासी मजदूरों को 5 किलो वाले सिलेंडर भी देंगे
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe
नईदिल्ली, एजेंसी। केंद्र ने शनिवार रात रेस्टोरेंट और ढाबे वालों को एलपीजी में बड़ी राहत दी। गैस संकट के बीच राज्यों को एलपीजी सप्लाई बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। कल से राज्यों को अब पहले के मुकाबले 20 प्रतिशत ज्यादा गैस दी जाएगी। इसके बाद राज्यों को मिलने वाली कुल सप्लाई संकट पहले के स्तर (प्री-क्राइसिस लेवल) के 50 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव डॉ. नीरज मित्तल ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर कहा है कि सामुदायिक रसोई, रेस्टोरेंट, ढाबों, होटलों और इंडस्ट्रियल कैंटीन को सप्लाई में प्राथमिकता दी जाए। प्रवासी मजदूरों को राहत देते हुए उन्हें प्राथमिकता से 5 किलो वाले फ्री ट्रेड एलपीजी (एफटीएल) सिलेंडर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या है ‘प्री-क्राइसिस लेवल’?
‘प्री-क्राइसिस लेवल’ का मतलब उस समय से है जब देश में गैस संकट शुरू नहीं हुआ था। फिलहाल राज्यों को बहुत कम सप्लाई मिल रही थी, जिसे अब बढ़ाकर पुरानी डिमांड का आधा (50%) किया गया है। अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल और गैस सप्लाई लगभग रुक गई है। इसके चलते शुरुआत में होटलों जैसे कमर्शियल संस्थानों को होने वाली एलपीजी आपूर्ति में कटौती की गई थी, ताकि घरेलू सिलेंडर की सप्लाई में परेशानी न हो।
इन्हें प्राथमिकता देंगे
यह अतिरिक्त 20 प्रतिशत गैस खास सेक्टरों को प्राथमिकता देकर दी जाएगी। डॉ. नीरज मित्तल के पत्र के मुताबिक, यह सप्लाई सबसे पहले रेस्टोरेंट, ढाबे, होटल और इंडस्ट्रियल कैंटीन को मिलेगी। सरकार का मकसद है कि खाने-पीने की सेवाओं और फूड इंडस्ट्री पर किसी तरह का असर कम से कम पड़े। गैस की कमी से बैंंगलुरु के नम्माओरु कॉफी कट्टा होटल में चूल्हा जलाकर इडली बनानी पड़ रही है।
अच्छा फैसला…
केंद्र सरकार का फैसला अच्छा है। इससे पर्यटकों और प्रवासियों में भूख का भय खत्म होगा। एलपीजी आपूर्ति ठीक होने से रेस्टोरेंट-ढाबों का काम भी ठीक चलेगा।
राकेश बनवट, होटल कारोबारी








