धरती का कलश भरने की कवायद तेज, 25 हजार रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का लक्ष्य

नगर निगम ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर, यूएमसी सेवा एप 311 पर भी भेज सकते हैं रिक्वेस्ट

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत शहर में करीब 25 हजार रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने का लक्ष्य तय किया है। साथ ही 101 रिचार्ज संरचनाएं विकसित करने की योजना भी बनाई है ताकि बारिश में यूं ही बह जाने वाली पानी की एक-एक बूंद को बचाकर उससे धरती का कलश भरा जाए।
अभियान के तहत यदि किसी को रैन वॉटर सिस्टम लगवाना है तो नगर निगम तकनीकी मदद करेगा। इसके लिए कोई भी हेल्पलाइन नंबर 0734-2535244, 323, 275 पर कॉल कर सकते हैं। इसके अलावा यूएमसी सेवा एप 311 पर रिक्वेस्ट भी भेज सकते हैं। शहरवासियों को इस अभियान की जानकारी आसानी से मिल सके और ज्यादा से ज्यादा लोग इस अभियान से जुड़ें, इसके लिए नगर निगम ने प्रचार के लिए शहरभर में जगह-जगह होर्डिंग्स लगाए हैं।
बता दें कि पिछले दिनों निगमायुक्त अभिलाष मिश्रा ने भी बैठक लेकर रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए थे। होटल, कोचिंग इंस्टीट्यूट, शासकीय भवनों एवं घरों में भी इस सिस्टम को लगाने के लिए लोगों को जागरूक करने की भी उन्होंने कही थी। इसके अलावा जल संरचनाओं जैसे कुएं, बावड़ी और तालाबों की नियमित सफाई, सौंदर्यीकरण और उनकी जानकारी पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश भी दिए थे।
इसलिए जरूरी रैन वॉटर हार्वेस्टिंग
रैन वॉटर हार्वेस्टिंग से बारिश का पानी छतों से पाइप के माध्यम से जमीन में पहुंचता है जिससे भू-जलस्तर बढ़ता है और बोरवेल-हैंडपंप रिचार्ज होते हैं। इससे टैंकर और सप्लाय पर निर्भरता भी घटती है। छतों पर पानी जमा नहीं होने से लीकेज और सीलन की समस्या भी कम होती है जिससे भवन की उम्र बढ़ती है। बारिश का पानी प्राकृतिक रूप से सबसे शुद्ध और साफ होता है जिसे शुरुआत फिल्टरिंग के बाद उपयोग में लिया जा सकता है। वहीं कॉलोनियों में सामूहिक सिस्टम होने से जलसंकट की स्थिति काफी हद तक कंट्रोल की जा सकती है।
हर साल बनती है जलसंकट की स्थिति
गर्मी के मौसम में हर साल शहर में जलसंकट की स्थिति बनती है। जिसके चलते एक दिन छोड़कर भी जलप्रदाय करना पड़ता है। ऐसे में कई इलाकों में पानी की कमी रहती है। इसके अलावा भू-जलस्तर गिरने से हैंडपंप और बोरवेल भी प्रभावित होते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण बारिश के पानी का सही तरीके से जमीन में ना पहुंचना है। शहर में बन रहे नए मकानों में भी स्थिति चिंताजनक है। हर साल जलसंकट के स्थिति बनने के बाद भी एक अनुमान के मुताबिक 80 फीसदी लोग इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
लोगों की रुचि काफी कम
140 वर्गमीटर के प्लॉट पर निर्माण के दौरान रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए 16 से 40 हजार रुपए तक की राशि डिपॉजिट के रूप में ली जाती है जो सिस्टम लगने के बाद वापस कर दी जाती है। डिपॉजिट राशि प्लॉट की साइज पर निर्भर करती है। बावजूद इसके लोग घरों में यह सिस्टम नहीं लगवाते जिससे हर बार बारिश का पानी व्यर्थ बह जाता है और धरती का कलश नहीं भर पाता।









