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पंचक्रोशी… एक दिन पहले ही चल पड़े यात्री

जोश से भरे, सिर पर पोटली और जुबां पर जय श्री महाकाल, 118 किमी पैदल चलेंगे

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अक्षरविश्व न्यूज|उज्जैन। 118 किमी लंबी कठिन पंचक्रोशी यात्रा की औपचारिक शुरुआत भले ही 12 अप्रैल से होनी है, लेकिन आस्था का सैलाब दो दिन पहले ही शहर में निकल पड़ा है। श्रद्धालुओं ने पटनी बाजार स्थित श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर में नारियल चढ़ाकर शुक्रवार शाम से ही अपनी यात्रा का श्रीगणेश कर दिया है।

यात्रा के शुरुआती दिन श्रद्धालुओं को शहर के कुछ रास्तों पर निर्माण कार्य और खुदाई के कारण कंकड़-पत्थरों से होकर गुजरना पड़ा। हालांकि, भक्तों का उत्साह ऐसा था कि वे गृहस्थी की पोटली सिर पर रखे पथरीली राहों पर भी आगे बढ़ते नजर आए। दोपहर की चिलचिलाती धूप और थकान मिटाने के लिए यात्रियों ने हीरामिल की चाल में बने पंडालों में विश्राम किया। यात्रा के पहले श्रद्धालुओं ने पटनी बाजार स्थित श्री नागचंद्रेश्वर में नागदेवता से प्रार्थना की कि यात्रा में किसी प्रकार की कठिनाई न हो और उन्हें 118 किमी पैदल चलने की शक्ति मिले। पुजारी शैलु गुरू के अनुसार, पहले दिन ही शुक्रवार को करीब २०00 से अधिक लोग निकल चुके हैं। शुक्रवार को आए हजारों श्रद्धालुओं ने रामघाट पर विश्रज्ञम किया और सुबह-सुबह शिप्रा स्नान व नागचंद्रेश्वर से बल लेकर यात्रा पर निकल पड़े। कई

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भक्तों के स्वागत में जुटा प्रशासन और ग्रामीण

यात्रा में इंदौर, रतलाम, शाजापुर, धार, देवास के ग्रामीण भी शामिल हैं। यात्री पहले पड़ाव पिंगलेश्वर की ओर बढ़ रहे हैं। यहां प्रशासन ने टैंकर और विश्राम स्थल बनाए हैं। ग्रामीणों ने भी अपने खेतों में टेंट लगाकर भोजन की व्यवस्था की है। उज्जयिनी सेवा समिति ने इंडस्ट्रीयल एरिया में भोजन प्रसाद निर्माण का काम शुरू किया है।

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समिति संयोजक घनश्याम पटेल, ओम अग्रवाल, मुरली तोतला, नोतन चेतवानी ने बताया प्रत्येक पड़ाव पर समिति की ओर से भोजन प्रसादी परोसी जाएगी। इसमें रोटी, लौंजी, मीठे चावल, ग्यारस पर मोरधन खिचड़ी दी जाएगी। पिंगलेश्वर महादेव को पूर्व दिशा का द्वारपाल माना जाता है। पुजारी शिवम शर्मा ने बताया पौराणिक कथा के अनुसार, माता-पिता के स्नेह से वंचित पिंगला नामक कन्या ने इसी स्थान पर घोर तपस्या कर शिव की कृपा प्राप्त की थी, इसीलिए इन्हें पिंगलेश्वर महादेव कहा जाता है।

नागचंद्रेश्वर से कर्कराज तक का कठिन पड़ाव

यात्रा विभिन्न पड़ावों से होकर गुजरती है। भक्त नागचंद्रेश्वर से 12 किमी दूर पिंगलेश्वर पहुँचते हैं, जहाँ से 23 किमी का अगला सफर कायावरुणेश्वर के लिए शुरू होता है। इसके बाद यात्रा नलवा उपपड़ाव से होते हुए 5 किमी दूर अंबोदिया (बिल्वकेश्वर) पहुँचती है। यात्रा का अगला चरण 21 किमी दूर कालियादेह और फिर 7 किमी दूर जैथल (दुर्दरेश्वर) है। अंत में श्रद्धालु उंडासा उपपड़ाव होते हुए शिप्रा घाट पहुँचकर कर्कराज महादेव के दर्शन के साथ अपनी इस कठिन तपस्या को पूर्ण करते हैं।

कोई सालों से आ रहा तो किसी को बुजुर्गों से मिली प्रेरणा

मैं 10 साल से यात्रा कर रही हूं। यात्रा में धर्मलाभ तो मिलता ही हैं। आनंद भी आता है। यात्रा के बाद मन हल्का हो जाता है। जब तक हाथ-पैर सलामत रहेंगे, यात्रा करते रहने की इच्छा है।
कुंदनबाई, बडऩगर

 पंचक्रोशी यात्रा पहली बार कर रहा हूं, मम्मी कई बार यह यात्रा कर चुकी हैं। उन्हीं से यात्रा करने की प्रेरणा मिली। लंबे समय से करने का मन था, लेकिन कठिन यात्रा की हिम्मत इस बार कर पाया।
विशाल आंजना, महिदपुर

राजकोट के जूनागढ़ में हनुमान मंदिर का पुजारी हूं। मनोकामना पूरी हुई तभी से पंचक्रोशी यात्रा के प्रति अगाढ़ श्रद्धा है। दो बार पहले यात्राएं कर चुका है। यह तीसरा साल है। आगे भी आते रहने की इच्छा है।
महेश नागर, जूनागढ़ राजकोट

 घर के सामने से यात्रा निकलती है। बचपन से ही यात्रियों का उत्साह देखकर इसमें शामिल होने की इच्छा होती थी। सौभाग्य अब मिला। यह मेरी दूसरी यात्रा है। यात्रा से लौटकर मन को सुकून मिलता है।
विश्वनाथ गौड़, उज्जैन

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