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पहले इंजीनियर थे महेंद्र जी अब संत बनकर आ रहे…

पहले इंजीनियर थे महेंद्र जी अब संत बनकर आ रहे…

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जैन मुनि मलयरत्नसागरजी का गृह नगर में 27 को मंगलप्रवेश

उज्जैन।जहां एक और अधिकांश वृद्ध और उम्रदराज व्यक्तियों इच्छा और भावनाएं रहती है कि वे वृद्धावस्था परिवार बच्चों-नाती-पोते के साथ जीवन व्यतित करें,वहीं दूसरी ओर ऐसे उदाहरण भी है,जिसमें एक इंजीनियर ने सांसारिक जीवन को छोड़कर जैन मुनि बन गए।

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हम बात कर रहे है ऋषभदेवजी छगनीरामजी पेढ़ी ट्रस्ट एवं श्री संघ खाराकुंआ उज्जैन के पूर्व अध्यक्ष महेंद्रकुमार सिरोलिया की। अब आप सन्यास ग्रहण कर मुनि मलयरत्नसागरजी हो गए है। मुनिश्री का सन्यास ग्रहण करने के बाद 27 जनवरी को पहली बार गृह नगर आगमन हो रहा है।

देवश्री नवरत्नसागर सुरीश्वर महाराज के प्रशिष्य,गणिवर्य आदर्शरत्नसागर महाराज के शिष्य मुनि मलयरत्नसागरजी का मंगलप्रवेश 27 जनवरी को होगा। मंगलप्रवेश सामैया प्रात: 9 कांच मंदिर दौलतगंज से निकलकर सखीपुरा, इंदौरगेट, नई सड़क, कंठाल, सराफा, नमकमंड़ी होते हुए खाराकुंआ मंदिर उपाश्रय पहुंचेगा। यहां धर्मसभा होगी।

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2020 में सन्यास धारण किया

समाजसेवी महेंद्रकुमार सिरोलिया श्री सिंथेटिक्स में इंजीनियर थे। फैक्ट्री बंद होने के बाद एक निजी कंपनी में सेवा देने के बाद सेवानिवृत्ती प्राप्त कर ली। इसके बाद पूरी तरह समाजसेवा में लीन हो गए। धार्मिक प्रवृत्ति के प्रति गहरी आस्थ हमेशा ही रही।

ऋषभदेवजी छगनीरामजी पेढ़ी ट्रस्ट एवं श्री संघ खाराकुंआ उज्जैन के पदाधिकारी बन कर धार्मिक-सामाजिक कार्यो में रत रहते वैरागयभाव और अधिक जागृत होने पर सन्यास धारण करने का निर्णय लिया।

पत्नि बीणाबेन सिरोलिया,पुत्रवधु रिंकलबेन,पुत्र सौरभकुमार सिरोलिया,पुत्री-दामाद सुरभी-वरूण,पौत्री रिया सिरोलिया,नाती मनन-रोमी के साथ सभी भौतिक सुख-सुविधा,संपदा और सांसारिक जीवन को त्याग कर जुलाई 2020 में भोपाल में आयोजित दीक्षा समारोह में दीक्षा ग्रहण कर मुनि मलयरत्नसागरजी बन गए।

3 हजार किमी से अधिक की यात्रा: मुनि मलयरत्नसागरजी के सांसारिक पुत्र सौरभकुमार सिरोलिया ने बताया कि मुनिश्री दीक्षा ग्रहण करने के बाद 3 हजार किमी से अधिक की यात्रा कर चुके है। इस दौरान बद्रीनाथ, हरिद्वार, राजस्थान सहित कई शहर और गांवों की यात्रा कर चुके है।

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