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बेहद महत्वपूर्ण होता है दशहरे का दिन

जानिए रावण से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

दशहरा हिंदू धर्म के सबसे लोकप्रिय त्योहारों में से एक है. इस बार दशहरा 05 अक्टूबर को मनाया जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन रावण का पुतला दहन के साथ-साथ आयुध पूजा भी होती है. इस दिन लोग अपने घर में मौजूद अस्त्र-शस्त्र की पूजा करते हैं. पौराणिक मान्यताओं की मानें तो विजय दशमी के दिन ही त्रेतायुग में प्रभु श्रीराम ने लंका नरेश रावण का वध किया था.

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यही वजह है कि वजयदशमी पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है. हिंदू धर्म से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को भगवान राम और उनसे जुड़े सभी किस्से जैसे राम रावण युद्ध याद ही होगा। रावण का नाम तो आपने सुना ही होगा क्योंकि प्रत्येक वर्ष दशहरे के दिन जगह-जगह पर रावण के पुतले जो जलाए जाते हैं तो उसके बारे में तो छोटे-छोटे बच्चे भी जानते हैं कि वह एक दुराचारी व्यक्ति था इसलिए भगवान राम ने उसका अंत किया।

 

परंतु रावण के जीवन की कुछ ऐसी अनकही और अनसुनी बातें हैं जिनके बारे में शायद आपने पहले कभी नहीं सुना होगा जो आज हम आप सभी को अपनी इस पोस्ट के जरिए विस्तारपूर्वक बताने वाले हैं तो चलिए आरंभ करते हैं रावण के जीवन की छोटी सी मानसिक यात्रा को। कौन था रावण? : रावण कौन था यह एक बहुत आसान सवाल है जिसका जवाब आप सब के पास होगा कि रावण लंका का राजा था।

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परंतु रावण कौन था इसका जवाब केवल एक वाक्य में नहीं दिया जा सकता क्योंकि रावण ज्ञान का एक अथाह भंडार था और उसके समान विद्वान पंडित इस पूरे विश्व में ना पहले कभी हुआ था और ना ही आगे कभी होगा। अब आप सोच रहे होंगे कि यदि वह पंडित था तो भगवान राम ने उसका वध क्यों किया? इसके बारे में हम आगे चर्चा और क्या करेंगे पहले रावण का पूरा परिचय जान लेते हैं।

दरअसल रावण एक बहुत बड़ा विद्वान राजनीतिज्ञ सेनापति, वास्तुकला का ज्ञाता और साथ ही बहुत सारे ज्ञान विज्ञान से जुड़े ग्रंथों का ज्ञाता रावण था। अपनी सिद्धि और तपोबल के जरिए उसने अपने जीवन में बहुत सारी मायावी शक्तियां अर्जित कर ली थी जिसकी वजह से उसे इंद्रजाल, तंत्र मंत्र, सम्मोहन और न जाने कितने प्रकार के जादू करने के लिए वह विख्यात था। यदि बात की जाए रावण के परिवार की तो रावण भगवान ब्रह्मा जी के वंशजों में से ही एक है।

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ब्रह्मा जी के कई सारे पुत्र थे जिनमें से उनके दसवे पुत्र का नाम अनाम प्रजापति पुलत्स्य था। रावण के पिता ऋषि विश्रवा एक बहुत महान ज्ञानी पंडित है जो सदैव धर्म के रास्ते पर ही चलते थे ब्रह्मा के वंशज होने के कारण रावण भगवान ब्रह्मा जी के पड़पोते थे। मुनि विश्रवा ने अपने जीवन काल में दो विवाह किये थे उनकी पहली पत्नी वरवणिनी और दूसरी पत्नी केकेसी थी।

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