लगातार बारिश से सोयाबीन की फसल को नुकसान

47 दिन के बाद भी पौधों की लंबाई नहीं बढ़ी
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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन ।मालवांचल में किसानों द्वारा सबसे ज्यादा पीला सोना माने जाने वाली सोयाबीन की फसल की जाती है। इस वर्ष भी 98 प्रतिशत किसानों ने खेतों में अलग-अलग किस्म की सोयाबीन की बुआई की। लेकिन अरली वैराइटी की सोयाबीन के पौधे 47 दिन बाद भी ज्यादा बढ़ नहीं पाए है। इसका कारण लगातार बारिश का होना है।

जिले के कई तहसीलों में स्थिति यह है कि 45 से 50 दिन के भीतर सोयाबीन की बुआई की गई थी। इतने दिनों में सोयाबीन का पौधा डेढ़ फीट तक हो जाता है लेकिन वर्तमान समय में आधा फीट तक ही पहुंच पाया है। अधिक बारिश होने के कारण सोयाबीन के पौधों को नुकसान पहुंचा है और कई खेतों में सोयाबीन की पत्तियां पीली पडऩे लगी हैं। ऐसे में किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें खींच गई है।
खेतों में पानी भर जाने से नुकसान
कई जगह खेतों से निकासी की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण ज्यादा बारिश होने के कारण पानी भर जाता है। ऐसे में फसल को नुकसान पहुंचता है। विनायगा निवासी किसान संजय आंजना, बड़वई निवासी पर्वतसिंह पटेल आदि ने कहा कि कृषि विभाग द्वारा फसल के बचाव के लिए समय-समय पर सुझाव दिए गए। लेकिन अधिक बारिश के कारण सोयाबीन की फसल को नुकसान होने की आशंका बनी हुई है।
खरपतवार का प्रकोप भी बढ़ा
सोयाबीन की फसल में खरपतवार जैसे दुद्दी, बोकना, घास आदि बढ़ गया है। किसानों ने इन्हें नष्ट करने के लिए दवाई का उपयोग किया। लेकिन बोकना, दुद्दी जैसे जंगली घास पर सब व्यर्थ नजर आ रहा है। कुछ दिनों तक यदि मौसम साफ रहा तो सोयाबीन की फसल को नुकसान नहीं होगा। लेकिन यदि जोरदार बारिश हो गई तो पौधों को नुकसान हो सकता है।









