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विदेशी सप्लीमेंट्स को टक्कर देते हैं ये 5 देसी फूड्स, 70 की उम्र में भी रख सकते हैं फिट और एक्टिव

कोविड महामारी के बाद लोगों की जीवनशैली में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अब लोग केवल स्वाद ही नहीं, बल्कि भोजन के पोषण मूल्य पर भी विशेष ध्यान दे रहे हैं। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण दुनियाभर में प्राकृतिक और पौष्टिक खाद्य पदार्थों की मांग तेजी से बढ़ी है। इसी कड़ी में भारत के कई पारंपरिक खाद्य पदार्थ अब वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रहे हैं।

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मखाना, सहजन, आंवला, बाजरा और हल्दी जैसे भारतीय सुपरफूड्स विदेशी बाजारों में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। पोषक तत्वों से भरपूर ये खाद्य पदार्थ बेहतर स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी माने जा रहे हैं।

मखाना बना स्वास्थ्य प्रेमियों की पहली पसंद

मखाना अब केवल भारतीय रसोई तक सीमित नहीं रह गया है। यह दुनिया के कई देशों में स्वास्थ्यवर्धक नाश्ते के रूप में लोकप्रिय हो चुका है। इसमें प्रोटीन, रेशा और प्राकृतिक प्रतिऑक्सीकारक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।

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कम कैलोरी और अधिक पोषण होने के कारण यह वजन नियंत्रित रखने में भी मददगार माना जाता है। मखाना लंबे समय तक पेट भरा रखने में सहायक होता है, इसलिए इसे स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग अपनी दैनिक भोजन योजना में शामिल कर रहे हैं।

सहजन की बढ़ती लोकप्रियता ने खींचा दुनिया का ध्यान

सहजन, जिसे मोरिंगा के नाम से भी जाना जाता है, दुनिया के सबसे पौष्टिक पौधों में से एक माना जाता है। इसकी पत्तियां, फलियां और चूर्ण कई देशों में स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों के रूप में उपयोग किए जा रहे हैं।

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सहजन में विटामिन, खनिज और प्राकृतिक प्रतिऑक्सीकारक तत्व प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सहजन आधारित उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। इसे सूप, पेय पदार्थों और विभिन्न खाद्य उत्पादों में शामिल किया जा रहा है।

आंवला भी बना प्राकृतिक स्वास्थ्य का खजाना

आंवला लंबे समय से भारतीय आयुर्वेद का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले गुण पाए जाते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार आंवला शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने, पाचन सुधारने और त्वचा व बालों को स्वस्थ रखने में सहायक हो सकता है। यही वजह है कि विदेशों में भी आंवला आधारित उत्पादों की मांग बढ़ रही है।

बाजरा ने फिर हासिल की अपनी पुरानी पहचान

बाजरा जैसे मोटे अनाज अब आधुनिक खानपान का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं। इसमें रेशा, प्रोटीन और कई आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ पाचन तंत्र को भी बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं।

स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग अब गेहूं और चावल के विकल्प के रूप में बाजरे को अपनी भोजन शैली में शामिल कर रहे हैं। इसके चलते वैश्विक बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

हल्दी की मांग में भी आया जबरदस्त उछाल

भारतीय रसोई का प्रमुख मसाला हल्दी अब दुनिया भर में प्राकृतिक स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद के रूप में पहचाना जा रहा है। हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन तत्व अपने प्रतिऑक्सीकारक और सूजनरोधी गुणों के लिए जाना जाता है।

इसी कारण कई देशों में हल्दी का उपयोग स्वास्थ्य पेय, पूरक आहार और विभिन्न औषधीय उत्पादों में किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इसकी मांग और अधिक बढ़ सकती है।

भारतीय सुपरफूड्स बन रहे वैश्विक स्वास्थ्य क्रांति का हिस्सा

प्राकृतिक और पौष्टिक खाद्य पदार्थों की ओर बढ़ते रुझान ने भारतीय सुपरफूड्स को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। मखाना, सहजन, आंवला, बाजरा और हल्दी जैसे पारंपरिक खाद्य पदार्थ अब केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में स्वास्थ्यवर्धक जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बनते जा रहे हैं।

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