आयुर्वेद एम्स प्रस्ताव में उज्जैन पिछड़ा, अब भोपाल पहले नंबर पर

उज्जैन में फार्मास्यूटिकल रिसर्च सेंटर और रतलाम में पेट्रोकेमिकल पार्क का प्रस्ताव
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। केंद्रीय बजट में देश में तीन आयुर्वेद एम्स खोलने के प्रस्ताव में उज्जैन पिछड़ गया है। राज्य सरकार के आयुष विभाग ने आयुर्वेद एम्स खोलने के लिए भोपाल को प्राथमिकता दी है। उज्जैन को दूसरे नंबर पर रखा है। हालांकि उज्जैन में फार्मास्युटिकल रिसर्च सेंटर और रतलाम में पेट्रोकेमिकल पार्क खोलने का प्रस्ताव रखा है।
दरअसल आयुर्वेद एम्स के लिए उज्जैन का दावा बेहद मजबूत था। इसकी वजह है उज्जैन का धन्वंतरि आयुर्वेद कॉलेज। कॉलेज की मेडिकल सुविधा ए ग्रेड की है और यहां रिसर्च भी ख्ूाब हो रहे हैं। पंचकर्म में उज्जैन आयुर्वेद कॉलेज पूरे प्रदेश में प्रथम नंबर पर है। केरल के बाद उज्जैन में ही सबसे बेहतर पंचकर्म होता है। कुछ समय पहले भी उज्जैन में आयुर्वेद एम्स खोलने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। इसके लिए अंकपात क्षेत्र में ही 50 एकड़ से ज्यादा जमीन की खोज भी चल रही थी। पर आयुष विभाग द्वारा भेजे प्रस्ताव में उज्जैन को दूसरे नंबर पर रखा गया है।
भोपाल को प्राथमिकता देने की दो वजह हो सकती है। पहला कनेक्टिविटी। दूसरा आयुर्वेद में उपयोग होने वाली जड़ी-बूटियों की उपलब्धता। भोपाल देश के मध्य में है और उसके आसपास सतपुड़ा का घना जंगल है। इन जंगलों में उच्च श्रेणी की जड़ी-बूटियां उपलब्ध है। माना जा रहा है कि इस वजह से भोपाल का प्रस्ताव भेजा गया है। हालांकि इस प्रस्ताव के स्वीकृत होने में एक रुकावट भी है। वह है भोपाल में एलोपैथिक का एम्स होना। अमूमन केंद्र सरकार एक ही शहर में दो एम्स नहीं रखती। ऐसे में उज्जैन की दावेदारी अभी भी मजूबत है।
उज्जैन-इंदौर रीजन में छोटी-बड़ी 150 से ज्यादा फार्मा कंपनी
राज्य सरकार ने उज्जैन में फार्मास्यूटिकल रिसर्च सेंटर खोलने का प्रस्ताव भेजा है। इसका फायदा उज्जैन-इंदौर रीजन में कार्यरत १५० से ज्यादा छोटी-बड़ी कंपनियों को हो सकता है। उज्जैन की दानिश फार्मा के एमडी मुर्तजाअली बड़वाहवाला बताते हैं कि रिसर्च सेंटर खुलने से नए प्रयोगों की जानकारी मिल सकेगी। इसका फायदा यूनिटों को होगा। उज्जैन-इंदौर इंडिया के सेंटर में है और यहां से देश के हर कोने में दवाइयां भेजने का नेटवर्क है। सन फार्मा, इप्का, सिप्ला जैसी इस रीजन में काम कर रही हैं। सेंटर का फायदा इन सभी को होगा।
रिसर्च और रोजगार के अवसर सृजित होंगे
मध्यप्रदेश फार्मेसी काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष ओम जैन भी भी कहते हैं कि रिसर्च सेंटर खुलने का बड़ा फायदा उज्जैन को होगा। रोजगार के अवसर सृजित होंगे और सबसे बड़ी बात नए प्रयोग की जानकारी भी तेजी से मिलेगी। यह फार्मा विद्यार्थियों के लिए भी सबसे अच्छा होगा। अभी विद्यार्थी डिग्री तो पूरी कर लेते हैं लेकिन रिसर्च में कमजोर रहते हैं। उज्जैन में सेंटर शुरू होने से नई खोजें हो सकेंगी। आज फार्मा यूनिट में लगने वाला कच्चा माल (एपीआई) चीन से आता है। चीन की इस क्षेत्र में मोनोपॉली है। अच्छे रिसर्च होने से हम देश में ही एपीआई तैयार कर सकेंगे। इसका फायदा कंपनियों के साथ आम आदमी को होगा।









