Monday, May 16, 2022
Homeउज्जैनउज्जैन : पितृ तर्पण और मोक्ष का श्राद्ध पक्ष शुरू

उज्जैन : पितृ तर्पण और मोक्ष का श्राद्ध पक्ष शुरू

सिद्धवट, गयाकोठा तीर्थ और रामघाट पर सुबह से लगी दर्शन पूजन करने वालों की लाईन

अक्षरविश्व प्रतिनिधि.उज्जैन। आज से पितरों का पर्व श्राद्ध पक्ष प्रारंभ हुआ। सुबह से लोगों ने पितृ मोक्ष की कामना को लेकर प्रमुख मंदिरों में दर्शन पूजन व तर्पण आदि कार्य सम्पन्न किये इसके अलावा घरों में भी धूप ध्यान का सिलसिला शुरू हुआ जो अगले 15 दिनों तक जारी रहेगा।

कहां कैसी व्यवस्था: पितृओं के तर्पण, पिण्डदान, पूजन आदि का महत्व उज्जैन के प्रमुख तीन स्थानों सिद्धवट, गयाकोठा तीर्थ और रामघाट पर पुराणों के अनुसार माना गया है। इन स्थानों पर पितृ के निमित्त कर्म करने से उनकी आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

सिद्धनाथ पर चल रहे निर्माण कार्य के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है

DSC 0061

पुराणों में भी वर्णन है इन तीर्थों पर तपर्ण का

DSC 0064
पुराणों में अवंतिका तीर्थ के रामघाट, सिद्धनाथ और गयाकोठा तीर्थ स्थानों का वर्णन और यहां तर्पण, पिण्डदान व पूजन दर्शन का महत्व बताया गया है। स्कंद पुराण के अनुसार सिद्धवट घाट पर प्रेतशिला तीर्थ व शक्ति भेद तीर्थ है इसके अलावा रामघाट पर पिशाच मोर्चन तीर्थ है और गयाकोठा तीर्थ पर गुप्त फाल्गू का प्राकट्य बताया गया है। पंडितों के अनुसार इन तीर्थ स्थानों पर श्राद्ध पक्ष के दौरान पितृओं का तर्पण, पिण्डदान, दर्शन पूजन करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है साथ ही कर्म करने वाले को पुण्य फल प्राप्त होता है। इन तीर्थ स्थलों पर श्राद्ध पक्ष के अलावा अमावस, चौदस पर भी दर्शन का विशेष महत्व बताया गया है।

सिद्धनाथ घाट

DSC 0082
सिद्धनाथ घाट पर वर्तमान में विभिन्न निर्माण कार्य शासन द्वारा कराये जा रहे हैं जो अभी अधूरे पड़े हुए हैं। घाट तक पहुंचने से पहले गंदगी और कचरे के अलावा निर्माण मटेरियल गिट्टी, रेती आदि पड़े हुए हैं इस कारण लोगों को घाट और मंदिर तक आने जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खास बात यह कि नगर निगम द्वारा सिद्धनाथ घाट और खाली परिसर में सफाई की पूर्व से कोई व्यवस्था नहीं की गई है। आवारा मवेशी, श्वान बड़ी संख्या में भीड़ में घूम रहे हैं। वाहन पार्किंग की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग यहां वहां खाली स्थानों के अलावा मेन रोड़ पर ही वाहन खड़े कर रहे हैं जिससे आवागमन प्रभावित हो रहा है। पुलिस विभाग द्वारा एसआई स्तर के अधिकारी और जवानों की ड्यूटी लगाई गई है।

गयाकोठा तीर्थ

DSC 0053
खाकचौक के पास स्थित गयाकोठा तीर्थ पर पितृ पक्ष में दुग्धाभिषेक का महत्व है। इसके अलावा लोगों द्वारा पिण्डदान व तर्पण भी बड़े पैमाने पर किया जाता है। सुबह से यहां लोग पहुंचना शुरू हो चुके थे। दोपहर 12 बजे तक लंबी कतार लग चुकी थी। खास बात यह कि मंदिर में प्रवेश और निगम का एक ही मार्ग होने के कारण परेशानी उत्पन्न हो रही थी। यहां भी मंदिर के आसपास निर्माण कार्य चल रहे हैं जो अधूरे पड़े हैं। कीचड़ व गंदगी के बीच लोगों को मंदिर परिसर के आसपास आवागमन करना पड़ रहा है। मंदिर में चढऩे वाला दूध नाली के रास्ते बाहर बह रहा था। पंडों द्वारा अधूरे निर्माण कार्य के बीच पूजन व अन्य कार्य सम्पन्न कराया गया। देश भर के सैकड़ों लोग सुबह से यहां पहुंचना शुरू हो चुके थे।

रामघाट

DSC 0087
शिप्रा नदी के रामघाट पर भी सुबह से तर्पण, पूजन करने वालों की अच्छी भीड़ रही। रामानुजकोट से रामघाट की ओर आने वाले मार्ग पर बेरिकेडिंग कर वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित किया गया है। घाटों पर सैकड़ों लोगों ने बैठकर पूजन कार्य सम्पन्न किया। यहां पर नगर निगम द्वारा एक दिन पहले से सफाई कराई गई और थाना प्रभारी स्तर के अधिकारियों के साथ जवानों की ड्यूटी लगाई गई है।

तिथियों की घटबढ़…

पं. मोहन गुरू डंडावाला ने बताया कि इस वर्ष तिथियों की घटबढ़ के कारण पितृ पक्ष 15 दिनों तक ही रहेगा जबकि इसके बाद आने वाले नवरात्रि पर्व पर भी तिथियों का असर रहेगा। खास बात यह कि ऑनलाइन पूजन व कर्मकांड का पुराणो में कोई उल्लेख नहीं है और यह नियम विरूद्ध है। पं. डंडावाला के अनुसार पौराणोक्त तीर्थ स्थलों पर पहुंचकर लोगों को पितृ के निमित्त तर्पण, पिण्डदान व पूजन विधि सम्पन्न करना चाहिये और इसी का फल प्राप्त होता होता है।

जरूर पढ़ें

मोस्ट पॉपुलर