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ज्येष्ठ अधिकमास में शनिश्चरी अमावस्या का महासंयोग

हजारों श्रद्धालु लगाएंगे आस्था की डुबकी, धूमधाम से मनेगा शनिदेव का जन्मोत्सव

 

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। ज्येष्ठ अधिकमास में 16 मई को शनिश्चरी अमावस्या का महासंयोग बनने जा रहा है। इस दिन हजारों भक्त उज्जैन पहुंचेंगे और इंदौर रोड स्थित त्रिवेणी पर मोक्षदायिनी शिप्रा में आस्था की डुबकी लगाएंगे। इसी दिन शनि मंदिरों में भगवान शनिदेव का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। भक्त दर्शन के लिए पहुंचेंगे और भगवान शनिदेव का तेल से अभिषेक कर पूजन करेंगे। बताया जा रहा है कि ज्येष्ठ अधिकमास मेें शनिश्चरी अमावस्या का ऐसा ही संयोग वर्ष 1999 में बना था।

दरअसल, ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक भारतीय ज्योतिष शास्त्र में न्याय के देवता के रूप में जाने वाले शनिदेव का जन्म ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या पर हुआ था। इस बार ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या 16 मई को शनिवार के दिन आ रही है इसलिए यह शनिश्चरी अमावस्या कहलाएगी। विशेष यह है कि 16 मई को ज्येष्ठ अधिकमास के प्रथम पखवाड़े का आखिरी दिन है। इसके बाद १७ मई से १५ जून तक ज्येष्ठ अधिकमास रहेगा। अधिकमास की शुरुआत शनिश्चरी अमावस्या महापर्व के साथ होने से यह धर्म, अध्यात्म, दान-पुण्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मान्यता है कि ऐसे शुभ दिन तीर्थ स्नान व शनिदेव की आराधना करने से जन्म-जन्मांतर के पापों का क्षय होता है तथा शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है।

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15 जून को सोमवती अमावस्या
15 जून को ज्येष्ठ अधिकमास का समापन होगा। इस दिन सोमवार को अमावस्या आने से यह सोमवती अमावस्या कहलाएगी। इस दिन भी बड़ी संख्या में शहर सहित आसपास से हजारों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचेंगे और शिप्रा में पर्व स्नान कर मंदिरों के दर्शन करने के बाद दान-पुण्य करेंगे। सोमवती अमावस्या का भी विशेष महत्व है।

शनिदेव की आराधना से मिलेगी राहत- ज्योतिषाचार्यों के अनुसार जिन जातकों को शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या, महादशा, अंतर्दशा, प्रत्यांतर दशा चल रही है उन जातकों को शनिश्चरी अमावस्या के संयोग में आई शनि जयंती पर भगवान शनिदेव की आराधना करना चाहिए। शनिदेव का तेल से अभिषेक तथा शनि की वस्तुओं का दान करने से भी अनुकूलता प्राप्त होती है।

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