Monday, November 28, 2022
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कविता: नई खिड़किया

आभासी दुनियां की कक्षा में
कंप्यूटर बन गया है टीचर,
हम बच्चों को वह पढ़ाता ,
खुलते ही मुस्काने लगता !
सारे बच्चे चहकने लगते ,

हाथ हिला बतियाने लगते ,
टीचर की आवाज को सुन ,
घर में बैठ ध्यान से पढ़ते !
गोल- गोल दुनिया की बातें
सीख बन , मिल रही सौगातें

तकनीक ने खोली नईं खिड़कियाँ
रोशन हो गई बच्चों की दुनियाँ !

– डॉ. वसुधा गाडगिल , इंदौर.

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