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टैक्सटाइल एक्सपोर्ट चैंपियन बनेगा उज्जैन

डिस्ट्रिक्ट एक्सपोर्ट एक्शन प्लान की बैठक : 2030 तक 5 हजार करोड़ के एक्सपोर्ट का टारगेट हासिल करने की बनी रणनीति

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। उज्जैन अब टैक्सटाइल निर्यात के क्षेत्र में नई पहचान बनाने की तैयारी कर रहा है। केंद्र सरकार ने ‘टेक्सटाइल्स फॉर ग्लोबल मार्केट’ प्रोजेक्ट के तहत उज्जैन को ‘चैंपियन डिस्ट्रिक्टÓ चुना है। 2030 तक उज्जैन से पांच हजार करोड़ के टैक्सटाइल निर्यात का लक्ष्य हासिल करने के लिए मंगलवार को डिस्ट्रिक्ट एक्सपोर्ट एक्शन कमेटी की बैठक हुई। इसमें कई बिंदुओं पर विचार किया गया।

एमपीआईडीसी (मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम) के कार्यकारी संचालक राजेश राठौड़ की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में जिला प्रशासन, उद्योग विभाग, निर्यातकों और टैक्सटाइल कारोबार से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए। इसमें मौजूदा निर्यात की स्थिति, चैंपियन जिले का दर्जा और 2030 के लक्ष्य को हासिल करने पर विचार किया गया। टारगेट हासिल करने में आने वाली मुख्य चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई और इनसे निपटने के प्लान भी बनाए गए।

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पीपीटी से बताया प्रजेंटेशन- मीटिंग में पीपीटी प्रेजेंटेशन के जरिए बताया गया कि भारत सरकार 2030 तक देश के टैक्सटाइल निर्यात को 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाना चाहती है। केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय ने इसके लिए देशभर में 100 चैंपियन और 100 आकांक्षी जिलों की पहचान की है। उज्जैन को चैंपियन जिला चुना गया है।

क्या हैं चैंपियन और आकांक्षी जिले

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केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय ने चैंपियन और आकांक्षी जिलों के पहचान
वहां मौजूद सुविधाओं के आधार पर की है।

1. चैंपियन : यह वह जिले हंै, जहां टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज चल रही है यानि यहां बुनियादी इंन्फ्रास्ट्रक्चर मौजूद है। इसमें कच्चा माल, श्रमिकों की उपलब्धता, ट्रांसपोर्टेशन, बिजली की उपलब्धता, जलाशय आदि शामिल हैं। उज्जैन इसलिए इस श्रेणी में है कि यहां टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज रन हो रही हैं। इनके लिए कच्चा माल भी उपलब्ध है। पानी, बिजली के साथ ही उज्जैन से ट्रांसपोर्ट की बेहतर सुविधा भी है।

2. आकांक्षी : यह वह जिले हैं जहां बुनियादी इंन्फ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह नहीं है। जैसे कच्चे माल की उपलब्धता है तो श्रमिक नहीं है। बिजली, पानी है तो ट्रांसपोर्ट महंगा है।

मीटिंग में क्या हुआ

ईडी राठौर ने उपस्थित जन को बताया कि टैक्सटाइल सेक्टर के लिए विशेष रणनीति तैयार की जा रही है। उद्योग प्रतिनिधियों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि यदि सरकार की ओर से आवश्यक बुनियादी सुविधाएं और सहयोग मिलता रहा तो उज्जैन आने वाले वर्षों में देश के प्रमुख टैक्सटाइल निर्यात केंद्रों में शामिल हो सकता है। ईडी ने बताया कि उज्जैन में टैक्सटाइल निर्यात बढ़ाने के लिए चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाएगी। हर विभाग और संस्था की जिम्मेदारी तय की जाएगी तथा अगले एक-दो वर्षों में व्यावहारिक रणनीति के साथ काम आगे बढ़ाया जाएगा।

टैक्सटाइल पार्क और नए इकोसिस्टम पर जोर
बैठक में उज्जैन में बड़े टैक्सटाइल पार्क विकसित करने पर जोर दिया गया। उद्योग प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि मल्टी-स्टोरी इंडस्ट्रियल मॉडल के जरिए एक ही स्थान पर संपूर्ण टेक्सटाइल ईकोसिस्टम तैयार किया जा सकता है, जिससे उत्पादन, पैकेजिंग, ट्रांसपोर्ट और सप्लाई चेन को गति मिलेगी। राठौड़ ने प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया।

उज्जैन से 11 माह में निर्यात हुआ 700 करोड़ का मटेरियल

बैठक में रखे गए आंकड़ों के अनुसार पिछले 11 महीनों में उज्जैन जिले से करीब 2,070 करोड़ का निर्यात हुआ, जिसमें टैक्सटाइल और अपैरल सेक्टर की हिस्सेदारी लगभग 700 करोड़ की रही। यह जिले के कुल निर्यात का करीब 30 प्रतिशत है। वर्ष 2030 तक टैक्सटाइल निर्यात को बढ़ाकर करीब 5 हजार करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। उज्जैन से वर्तमान में विस्कोस रेयान स्टेपल फाइबर, अंडरगारमेंट्स, कॉटन टी-शर्ट्स, फ्रेबिक्स और कच्चे कपास का निर्यात प्रमुख है। इनमें विस्कोस रेयान स्टेपल फाइबर का निर्यात करीब 372 करोड़ का है। अंडरगारमेंट्स का 139 करोड़, कॉटन टी-शर्ट्स का 70 करोड़, फ्रेबिक्स का 24 करोड़ और कच्चे कपास का लगभग 12 करोड़ का निर्यात हो रहा है।

वर्कशॉप और इंटरेक्टिव सेशन
बैठक में तय किया गया कि स्थानीय उद्यमियों के लिए विशेषज्ञों के साथ नियमित वर्कशॉप और इंटरैक्शन सेशन आयोजन किए जाएंगे। इसमें अवसरों, उत्पादों, प्रोसीजर, वित्तीय सहायता, सर्टिफिकेशन और निर्यात संबंधी जानकारी एक्सपर्ट्स के द्वारा दी जाएगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार, गुणवत्ता सुधार और निर्यात मानकों के बारे में भी बताया जाएगा। राठौड़ ने कहा कि उत्पादक, निर्यातक और प्रशासन यदि टीम के रूप में काम करेंगे, तभी लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।

महिला कामगारों को बनाएं ब्रांड एंबेसडर
बैठक में यह भी माना गया कि समाज में फैली रूढिय़ां कामगारों, खासकर महिलाओं को फैक्ट्रियों से दूर रखती हैं। तय हुआ कि महिला श्रमिकों को ब्रांड एंबेसडर बनाकर उनका आत्मविश्वास बढ़ाया जाएगा। जब उन्हें समाज का सहयोग मिलेगा, तभी टेक्सटाइल सेक्टर मजबूत होगा और उज्जैन सच्चा चैंपियन बनेगा।

अमेरिका में सबसे मांग- उज्जैन के टैक्सटाइल उत्पादों की सबसे ज्यादा मांग अमेरिका में है। इसके अलावा तुर्की, नेपाल, चीन और बांग्लादेश भी जिले के प्रमुख निर्यात बाजार हैं। बैठक में डीआईसी के जोनल अधिकारी एसएस मंडलोई, एमपीआईडीसी के जीएम विनय सिंह तोमर, टैक्सटाइल और हैंडलूम सेक्टर से जुड़े कई उद्योग प्रतिनिधियों में ऋषभ सुरोम (बाटिक), सुमित राठ (एचएसवीए यूजेएम), प्रहलाद वांधे (जिला हैंडलूम), आशा दुबे (एनआरएलएम), निलेश (बेस्ट लाइफ), योगिता पुरोहित (बाटिक), मुकेश उया (प्रतिभा सिंटेक्स), मोहम्मद अमन (अमन आर्टिस्ट), अमान छीपा (नूर टेक्सटाइल्स), प्रेरणा (स्वास्तिक), प्रीत साथे (स्वास्तिक), मो. कासिम (कासिम शरीफ बाटिक) और मुकेश भाटी (यशोदा लिनेन) शामिल रहे।

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