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विवि में पूरी तरह डिजिटल होगी परीक्षा मूल्यांकन प्रणाली

आंसर शीट की पारंपरिक जांच के बजाय लागू होगा डिजिटल इवैल्यूएशन सिस्टम

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय अपनी परीक्षा मूल्यांकन प्रणाली को पूरी तरह से डिजिटल करने जा रहा है। इस नई व्यवस्था के तहत स्टूडेंट्स की आंसर शीट की पारंपरिक जांच के बजाय डिजिटल इवैल्यूएशन सिस्टम को लागू किया जा रहा है। इस बदलाव का सीधा असर यह होगा कि विद्यार्थियों को उनके परीक्षा परिणामों में होने वाली देसी से मुक्ति मिल जाएगी।

दरअसल, विश्वविद्यालय का उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना, त्रुटियों को कम करना और परिणामों की घोषणा को तेज करना है। नई प्रणाली के तहत विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं को बिना किसी क्षति के स्कैन कर डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जाएगा। इसके बाद शिक्षक कम्प्यूटर स्क्रीन पर ही कॉपियों को जांच सकेंगे। इस प्रणाली में टोटलिंग (अंकों का योग) और अधिकतम अंकों की जांच जैसे काम सॉफ्टवेयर द्वारा स्वचालित रूप से किए जाएंगे।

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सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

विद्यार्थियों की गोपनीयता बनाए रखने के लिए विवि ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। उत्तर पुस्तिकाओं पर रैंडम नंबर और क्यूआर/बारकोड तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे मूल्यांकन करने वाले शिक्षक को स्टूडेंट्स की पहचान का पता नहीं चल सकेगा। शिक्षकों को मूल्यांकन के लिए सुरक्षित लॉगइन आईडी और पासवर्ड दिए जाएंगे जो उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजे जाएंगे।

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स्टूडेंट्स को मिलेंगी यह सुविधाएं

डिजिटल होने से कॉपियों के इधर-उधर जाने का समय बचेगा और रिजल्स समय पर आएंगे।

स्टूडेंट्स अपनी जांची हुई आंसर शीट को वेब सेवाओं के माध्यम से देख सकेंगे।

यदि कोई छात्र दोबारा जांच करवाना चाहता है तो पुराने अंक दिखाए बिना निष्पक्ष पुनर्मूल्यांकन की सुविधा होगी।

विवि ने इस प्रोजेक्ट के लिए सख्त मापदंड निर्धारित किए हैं। इस काम के लिए केवल उन्हीं अनुभवी संस्थाओं को चुना जाएगा जो पिछले आठ वर्षों से इस क्षेत्र में कार्यरत हैं। जिनका सालाना टर्नओवर 10 करोड़ से ज्यादा है। चयनित एजेंसी के साथ पांच वर्ष का अनुबंध किया जाएगा। जिसे संतोषजनक कार्य होने पर आगे बढ़ाया जा सकता है।

इनका कहना
परीक्षा मूल्यांकन प्रणाली को इस सत्र से डिजिटल करने की तैयारिया की जा रही हैं। इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
डॉ. अर्पण भारद्वाज, कुलगुरु, सम्राट विक्रमादित्य विवि

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