Monday, November 28, 2022
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व्यंग्य :कोरोना का नगर भ्रमण

कोरोना, चलते चलते अचानक रुक गया और चौराहे की तरफ देखने लगा जहां दो पुलिसकर्मी बैरिकेडस के पास खड़े होकर लोगों को हिदायत दे रहे थे। वह स्वयं वहां पहुंच गया और अपना सीधा हाथ आगे कर दिया मगर ड्यूटी पर तैनात जवानों ने दूर से ही हाथ जोड़ लिए। तब उसने अपना परिचय दिया मैं ‘कोरोना’ पुलिसकर्मियों ने उस पर ऊपर से नीचे तक दृष्टि डाली फिर घूर कर कहा यहां सड़क पर फालतू क्यों घूम रहे हो देख नही रहे ‘शहर में लॉकडाउन चल रहा है।

हां मुझे पता है ‘मेरे ही कारण हर शहर में लॉकडाउन है।’ अच्छा! ज्यादा हेकड़ी मत दिखाओ वरना दो पिछवाड़े पर लगाकर अंदर कर दूंगा, समझे। ‘ज्यो मुझे अंदर किया तो बाद में सबको बाहर करना पड़ेगा अस्पताल छोटा पड़ जाएगा तुम्हारा। कोई पागल लगता है। पुलिसकर्मियों ने आंखेां ही आंखों में संवाद किया इसे जाने दो यहां से। उनसे पीछा छुड़ाकर कोरोना आगे बढ़ गया जहां एक गाड़ी में बहुत सारे पैकेट रखे हुए थे उसे देखकर वह रुक गया यह क्या कर रहे लॉकडाउन में, भूखे लोगों को खाना खिला रहा हूं। शहर के लोग भूखे न रहे इस हेतु उन्हें खाने के पैकेट बांट रहा हूँ क्या सरकार यह सब नहीं कर रही।

हां सरकार भी कर रही है और सेवाभावी लोग भी सुना है कुछ लोग इस ‘धर्म के कार्य में भी हेराफेरी कर रहे हैं। भूखे लगते हो, खाना चाहिए। उसने खाने का पैकेट आगे बढ़ा दिया। मैं कोरोना हूं खाना नहीं लोगों को खाता हूं और वह आगे बढ़ गया जहां सरकारी अस्पताल का बोर्ड लगा था। अंदर दाखिल होते ही पीपीई किट पहने डॉक्टर मिल गए ‘ए कहां घुसे चले आ रहे हो देखते नहीं यहां जांच चल रही है’और उनमें से एक डॉक्टर ने कोरोना के सिर पर थर्मल सेंसर गन अड़ा दी अरे इसे तो टेम्प्रेचर है जांच करो और इसकी कॉन्टैक्ट हिस्ट्री भी निकालो? कोरोना हंस दिया’ कहां-कहां की कॉन्टैक्ट हिस्ट्री निकालोगे डॉक्टर साहब’ पूरे एक सौ अस्सी देश की हिस्ट्री है मेरी मेरे ही कारण पूरी दुनिया मे कोहराम मचा है, मेरे ही कारण यह अस्पताल कोरोना कोविड सेंटर बना हुआ है।

पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था मैंने ही तबाह की है सभी विश्व नेता आपसी मतभेद भुलाकर आज मेरे ही डर के कारण एक दूसरे को सहयोग कर रहे हैं। कई देश वैक्सीन बनाने का दावा कर रहे है मगर मेरा प्रतिकार सिर्फ भारत ही कर पाया है अपनी सहिष्णुता और अपने आयुर्वेद के खजाने के कारण। समूची दुनिया परमाणु बम के बल पर एक-दूसरे को नीचा दिखा दिखाने में लगी हुई है। विश्व की महाशक्ति को अपने ज्ञान और विज्ञान पर बहुत घमंड था मगर बड़ी मात्रा में हाइड्रॉक्सि क्लोरोक्विन सल्फेट आयात करने के बाद भी आज सबसे ज्यादा दुर्गति उसी की हुई है। कोई तानाशाह बनना चाहता है तो कोई इतनी बड़ी महामारी के बाद आज भी कश्मीर मांग रहा है फिर भले ही उसके देशवासी बे मौत मर रहे हो, किंतु वह आज भी सीमा पार से घुसपैठ की कोशिश में लगा है। ध्यान रहे तुम भले ही चांद और मंगल पर हो आए हो मगर मेरा निदान आज भी, मेरे अलावा किसी के पास नहीं है। अगर वास्तव में इस दुनिया को विनाश से बचाना चाहते हो तो मानवता का सम्मान करो उसे अक्षुण्य रखो। मैं इस धरती पर यही संदेश देने आया हूं। इतना कहकर कोरोना खुद क्वारेंटाइन होने चला गया।
अनिल गुप्ता, उज्जैन

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