Monday, November 28, 2022
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सत्य पर न चढ़े झूठ का आवरण

कौन समझेगा जीवन की ये व्याकरण
सत्य पर ना चढ़े झूठ के आवरण

सत्य है शाश्वत इसका आधार है
झूठ का हो रहा फिर भी विस्तार है
सत्य विचलित नहीं और विभाजित नहीं
सत्य पर सत्य का सिर्फ अधिकार है
सत्य निष्ठा से कर सत्य के आचरण
सत्य पर ना चढ़े झूठ के आवरण

पूर्ण निष्ठा लगन से किया काम है
आत्मबल, शुद्ध निष्ठा का परिणाम है
भक्ति करले मधुर
शक्ति भरले प्रचूर
उच्च निष्ठा मे रत कर्म निष्काम है
श्रेष्ठ निष्ठा से कर सत्य के जागरण
सत्य पर ना चढ़े झूठ के आवरण

राह पर जो चले सिर्फ ईमान की
कद्र होती सदा ऐसे इंसान की
कर्म ईमान हो मर्म ईमान हो
करने लगता है रक्षा ये स्वाभिमान की
इस को सबसे सुरक्षित रखो आमरण
सत्य पर ना चढ़े झूठ के आवरण

धर्म पर जो चलोगे झुकोगे नहीं
आए कितनी ही विपदा डरोगे नहीं
धर्म से पल्लवित हो ये पावन धरा
धर्म पथ से विमुख फिर रहोगे नहीं
धर्म की ले ध्वजा प्रभु की आ जा शरण
सत्य पर ना चढ़े झूठ के आवरण

सकारात्मक सोच उत्पन्न हो
सादगी नम्रता प्रेम आसन्न हो
संस्कारित रहे सुविचारित रहे
मानवीय मूल्य जीवन में प्रतिपन्न हो
पुण्य कर ले जमा ना करो आहरण
सत्य पर ना चढ़े झूठ के आवरण

कौन समझेगा जीवन की यह व्याकरण
सत्य पर ना चढ़े झूठ के आवरण

-प्रोफेसर रवि नगाइच

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