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उज्जैन में त्रिवेणी घाट पर शिप्रा नदी में हुए धमाके की जांच करने पहुंची GSI की टीम

त्रिवेणी स्टाप डेम पर शिप्रा नदी में हुए धमाके व आग के बाद जांच करने भोपाल से आए भूवैज्ञानिक

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पानी व मिट्टी के सैंपल लिए भोपाल की लैब में होगी जांच

टीम ने कहा- फिलहाल अनुमान संभव नहीं

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उज्जैन। त्रिवेणी स्टापडेम पर नदी में धमाके और आग की लपटें निकलने के फोटो, वीडियो वायरल होने के बाद कलेक्टर ने जीएसआई की राज्य इकाई भोपाल को जांच के लिये पत्र लिखा था। सुबह भोपाल से भू वैज्ञानिक एवं रसायनिज्ञ की तीन सदस्यीय टीम त्रिवेणी स्टापडेम पहुंची। यहां से पानी और मिट्टी के सेम्पल लेने के साथ ही सरपंच व अन्य प्रत्यक्षदर्शी ग्रामीणों से चर्चा भी की है। वैज्ञानिकों ने चर्चा में कहा कि अभी कुछ भी अनुमान लगाना संभव नहीं है। सैंपलों की जांच रिपोर्ट के बाद आगे की रूपरेखा बनाएंगे।

यह था मामला : आग और धमाके हुए थे, इससे पानी 10 फीट तक उठला था
त्रिवेणी स्टापडेम में फिलहाल त्रिवेणी घाट की ओर पानी भरा है जबकि दूसरी ओर नदी खाली पड़ी है। छोटी डबरियों में पानी भरा है। 27 फरवरी को त्रिवेणी स्टापडेम के खाली पड़े हिस्से के डबरे में भरे पानी में ग्रामीणों ने आग की लपटें निकलते देखीं। इसके साथ धमाकों की आवाज भी हुई थी। दूसरे दिन भी यही घटना शाम के समय हुई। लोगों ने इसके वीडियो, फोटो मोबाइल से बनाये और सोशल मीडिया पर वायरल भी किये थे। ग्रामीणों ने बताया था कि दोपहर व शाम के समय नदी में धमाके व आग की लपटें कुछ सेकंड के लिये निकलती हैं, पानी भी 10 फीट तक उछलता है। पीएचई अधिकारियों ने यहां से पानी के सेम्पल लेकर जांच की लेकिन किसी प्रकार के रसायन की जानकारी नहीं मिली। इस पर कलेक्टर द्वारा जीएसआई की राज्य इकाई भोपाल को जांच के लिये पत्र लिखा गया।

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3 घंटे तक वैज्ञानिकों ने की जांच
भोपाल से रविवार रात ही भू एवं रासायनिज्ञ वैज्ञानिकों की तीन सदस्यीय टीम उज्जैन पहुंच चुकी थी। सुबह 8 बजे वरिष्ठ भू वैज्ञानिक अरूण कुमार, सहायक भू वैज्ञानिक डॉ. एल.के. शर्मा, वरिष्ठ रायनिज्ञ डॉ. राकेश शर्मा त्रिवेणी स्टापडेम पहुंचे। इस दौरान आसपास रहने वाले ग्रामीणों की भीड़ लग गई। पुलिस के अलावा यहां पर पीएचई कर्मचारी भी मौजूद रहे। भू वैज्ञानिक अरुण कुमार ने चर्चा में बताया कि सरपंच सहित प्रत्यक्षदर्शी ग्रामीणों से चर्चा की गई है साथ ही वीडियो भी देखे हैं। धमाके और आग निकलने की घटना कुछ दिनों व समय के अंतराल में हो रही है। तीन घंटों में ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला इस कारण पानी और मिट्टी के सेम्पल लिये हैं जिनकी जांच भोपाल लैब में की जायेगी। जांच रिपोर्ट और यहां की स्थिति से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराएंगे। फिलहाल अर्थक्वेक या अन्य संभावनाओं के बारे में कुछ कहना उचित नहीं होगा।

रिपोर्ट के बाद ही खाली कराएंगे पानी
जिस स्थान पर पानी में आग व धमाके जैसी हलचल हो रही है उस जगह पानी भरा है। धमाके के बाद पानी का रंग बदल जाता है। पानी भरा होने के कारण उसके नीचे से मिट्टी के सेम्पल तो लिये हैं, लेकिन पानी खाली नहीं कराया गया। भू वैज्ञानिकों का कहना है कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद पानी खाली कराने पर विचार किया जा सकता है।

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