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टीयर-3 सिटी से तेजी से मेट्रो की तरफ बढ़ रहा उज्जैन : रौशन कुमार सिंह

सिंहस्थ-2028 की तैयारी में दिन-रात एक कर रहे कलेक्टर से खास बातचीत

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उज्जैन में जिस तरह के और जिस तेजी से काम चल रहे हैं, उससे उज्जैन टीयर-3 सिटी से सीधे मेट्रो के बराबर खड़ा हो जाएगा। करीब २० हजार करोड़ रुपए की लागत से विश्व स्तरीय इंफ्रा तैयार हो रहा है। इनमें फोरलेन-सिक्सलेन, एलिवेटेड रोड, रोप-वे, मेडिसिटी, एयरपोर्ट, वनतारा जू, कान्ह डक्ट-सेवरखेड़ी, सिलारखेड़ी, हरियाखेड़ी प्रमुख हैं। यह उज्जैन शहर को एकदम से बदल देंगे। यह बात कलेक्टर रौशनकुमार सिंह ने कही। सिंह एडिटर विनोदसिंह सोमवंशी से चर्चा कर रहे थे। उनसे ङ्क्षसहस्थ की तैयारी को लेकर सवाल पूछा गया था। पेश है बातचीत के संपादित अंश…

Q. क्या सिंहस्थ उज्जैन की दशा और दिशा बदल देगा?

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A. सिंहस्थ 2028 के काम उज्जैन को पूरी तरह बदल देंगे। हमारा फोकस 30 करोड़ श्रद्धालुओं को शिप्रा के साफ जल में स्नान करवाकर उन्हें सुरक्षित उनके घर तक पहुंचाना है। उस हिसाब से शहर में व्यवस्था जुटाई जा रही है। नए घाट बन रहे हैं। कनेक्टिविटी पर खास फोकस है। फोरलेन, सिक्सलेन के साथ शहर की बाहरी और भीतरी सड़कों को चौड़ा किया जा रहा है। रेलयात्रियों के लिए नए रेलवे स्टेशनों का विकास किया जा रहा है। हवाई यात्रियों के लिए 500 हेक्टेयर में एयरपोर्ट तैयार किया जा रहा है।

Q. क्या उज्जैन टीयर-3 से आगे आ सकता है?

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A. बिल्कुल। उज्जैन को मेट्रो शहर के हिसाब से तैयार कर रहे हैं। इसके लिए पूरा ध्यान बुनियादी इंफ्रा पर है। इसी के तहत बड़े प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। इनमें रोड, पेयजल सप्लाई, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लान और पर्यटन प्रोजेक्ट शामिल हैं।

Q. उज्जैन के एलिवेटेड रोड प्रदेश के पहले होंगे?

A. उज्जैन में बनने वाले एलिवेटेड रोड प्रदेश के पहले होंगे। यह बहुत जरूरी थे। हरिफाटक ब्रिज से इंदिरानगर चौराहा और निकास चौराहा से इंंदौरगेट तक बनने वाले एलिवेटेड रोड से शहर में कनेक्टिविटी बेहतर होगी।

Q. महाकाल भक्तों के लिए क्या सुविधा कर रहे हैं ?

A.अभी दो लाख श्रद्धालु रोज आते हैं। सिंहस्थ में यह संख्या 10 लाख से ज्यादा होगी। ऐसे में मंदिर तक आने-जाने वाली सड़कों को चौड़ा किया जा रहा है। हरिफाटक ओवरब्रिज को चौड़ा कर रहे हैं।

Q.  मंदिरों के लिए अलग ढांचा होना चाहिए क्या?

A.निश्चित ही श्री महाकालेश्वर के साथ अन्य मंदिरों की व्यवस्था भी चुनौती है। महाकाल मंदिर के साथ अन्य मंदिरों की व्यवस्था भी सिंहस्थ के लिए बनाई जा रही है। मंदिरों के लिए अलग ढांचा बनाने का प्रस्ताव है।

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