Advertisement

पार्टनर हर बात पर ‘हम्म’ लिखता है? जानिए साइकोलॉजी क्या कहती है इसके पीछे का मतलब

आज के डिजिटल दौर में रिश्तों का बड़ा हिस्सा चैट और टेक्स्ट मैसेज पर टिका हुआ है। ऐसे में जब आप अपने पार्टनर से दिल की बात शेयर करें और सामने से सिर्फ “Hmm”, “हूँ”, “ओके” या “ठीक है” जैसा जवाब मिले, तो जाहिर है कि मन में कई सवाल उठने लगते हैं। क्या पार्टनर नाराज है? क्या उसे आपकी बातों में दिलचस्पी नहीं रही? या फिर रिश्ते में दूरी आने लगी है?

 

Advertisement

अगर आप भी बार-बार मिलने वाले इस एक शब्द के जवाब से परेशान हैं, तो इसके पीछे की मनोवैज्ञानिक वजहों को समझना जरूरी है। मशहूर साइकोलॉजिस्ट और रिलेशनशिप एक्सपर्ट डॉ. ध्रुति अंकलेसरिया के अनुसार, टेक्स्टिंग में इस्तेमाल होने वाला यह छोटा सा शब्द कई बार व्यक्ति की मानसिक स्थिति, भावनाओं और रिश्ते की स्थिति के बारे में बहुत कुछ बताता है।

रिश्तों में क्यों चुभता है सिर्फ “हम्म” वाला जवाब?

डॉ. ध्रुति अंकलेसरिया बताती हैं कि किसी भी मजबूत रिश्ते की नींव इमोशनल कनेक्शन पर टिकी होती है। जब कोई व्यक्ति अपने पार्टनर से कोई बात साझा करता है, तो उसका उद्देश्य सिर्फ जानकारी देना नहीं होता, बल्कि वह भावनात्मक जुड़ाव, समझ और सहानुभूति की उम्मीद करता है।

Advertisement

ऐसे में जब सामने से सिर्फ “हम्म”, “ओके” या “ठीक है” जैसा छोटा जवाब मिलता है, तो व्यक्ति खुद को नजरअंदाज किया हुआ महसूस कर सकता है। लगातार ऐसा होने पर उसे लगने लगता है कि उसकी भावनाओं की कोई अहमियत नहीं है या सामने वाला उसकी बातों को गंभीरता से नहीं ले रहा।

यही कारण है कि कई बार एक साधारण-सा “हम्म” भी रिश्तों में दूरी और गलतफहमियों की वजह बन जाता है।

Advertisement

साइकोलॉजिस्ट के अनुसार “हम्म” के पीछे छिपे 4 बड़े कारण

1. झगड़े और बहस से बचने की कोशिश

कई लोग किसी भी तरह के विवाद या बहस से बचना चाहते हैं। विशेष रूप से पुरुषों में यह प्रवृत्ति ज्यादा देखी जाती है। उन्हें लगता है कि अगर वे किसी संवेदनशील विषय पर विस्तार से बात करेंगे, तो मामला बहस में बदल सकता है।

ऐसी स्थिति में वे बातचीत को आगे बढ़ाने के बजाय “हम्म”, “ठीक है” या “ओके” जैसे छोटे जवाब देकर चर्चा को वहीं खत्म करने की कोशिश करते हैं। मनोविज्ञान में इसे एक तरह का डिफेंस मैकेनिज्म माना जाता है।

2. मानसिक थकान और ‘ब्रेन फेड’

हर बार “हम्म” का मतलब नाराजगी या बेरुखी नहीं होता। कई बार व्यक्ति मानसिक रूप से इतना थका हुआ होता है कि उसके पास लंबी बातचीत करने की ऊर्जा ही नहीं बचती।

ऑफिस का तनाव, काम का दबाव, निजी समस्याएं या दिनभर की भागदौड़ दिमाग को थका देती है। ऐसे समय में इंसान के लिए अपने विचारों को शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल हो जाता है।

साइकोलॉजी में इस स्थिति को “ब्रेन फेड” या मानसिक थकावट कहा जाता है। ऐसे में व्यक्ति सिर्फ “हम्म” लिखकर जवाब देता है क्योंकि उसके पास उससे ज्यादा कुछ कहने की मानसिक क्षमता नहीं बचती।

3. पैसिव-अग्रेसिव नाराजगी का संकेत

अगर आपका पार्टनर पहले लंबी-लंबी बातें करता था और अचानक हर बात पर सिर्फ “हम्म” लिखने लगा है, तो यह रिश्ते में किसी छिपी नाराजगी का संकेत हो सकता है।

डॉ. ध्रुति के अनुसार इसे पैसिव-अग्रेसिव बिहेवियर कहा जाता है। यानी व्यक्ति नाराज तो है, लेकिन अपनी नाराजगी सीधे तौर पर व्यक्त नहीं कर रहा। वह चाहता है कि आप उसके बदले हुए व्यवहार को देखकर खुद समझ जाएं कि कुछ गलत है।

ऐसे मामलों में “हम्म” केवल जवाब नहीं बल्कि एक संदेश होता है कि व्यक्ति अंदर ही अंदर किसी बात से परेशान है।

4. इंट्रोवर्ट व्यक्तित्व होना

हर इंसान का संवाद करने का तरीका अलग होता है। कुछ लोग बहुत ज्यादा एक्सप्रेसिव होते हैं, जबकि कुछ लोग स्वभाव से शांत और अंतर्मुखी यानी इंट्रोवर्ट होते हैं।

ऐसे लोगों के लिए “हम्म” का मतलब बेरुखी नहीं होता। उनके लिए यह एक सामान्य प्रतिक्रिया हो सकती है, जिसका अर्थ सिर्फ इतना होता है कि उन्होंने आपकी बात सुन ली है और वे उससे सहमत हैं।

इसलिए हर बार “हम्म” को रिश्ते में समस्या का संकेत मान लेना भी सही नहीं है।

महिलाओं को क्यों ज्यादा बुरा लगता है ऐसा जवाब?

डॉ. ध्रुति अंकलेसरिया के अनुसार इसके पीछे हमारे दिमाग की संरचना भी जिम्मेदार होती है। हमारे मस्तिष्क में एमिग्डाला नाम का हिस्सा भावनाओं को नियंत्रित करता है।

महिलाओं में यह हिस्सा अपेक्षाकृत अधिक सक्रिय और संवेदनशील होता है। यही वजह है कि महिलाएं बातचीत के दौरान भावनात्मक जुड़ाव, सराहना और तुरंत प्रतिक्रिया की अपेक्षा रखती हैं। वे चाहती हैं कि उनकी बात को महसूस किया जाए और उन्हें समझा जाए।

वहीं पुरुषों का एमिग्डाला अपेक्षाकृत अधिक केंद्रित और धीमी प्रतिक्रिया देने वाला माना जाता है। पुरुष अक्सर भावनाओं को समझने और उन्हें शब्दों में व्यक्त करने के लिए अधिक समय लेते हैं। इसी वजह से वे कई बार सीधे समाधान देने की कोशिश करते हैं या फिर चुप रह जाते हैं।

महिलाओं को समाधान नहीं, समझे जाने की जरूरत होती है

डॉ. ध्रुति का कहना है कि अधिकांश महिलाएं जब कोई समस्या साझा करती हैं, तो वे हमेशा उसका समाधान नहीं चाहतीं। कई बार वे सिर्फ यह चाहती हैं कि सामने वाला उनकी बात सुने, समझे और भावनात्मक रूप से उनका साथ दे।

दूसरी ओर पुरुष अक्सर समस्या सुनते ही समाधान बताने लगते हैं या बातचीत को छोटा कर देते हैं। यही अंतर कई बार रिश्तों में इमोशनल गैप पैदा कर देता है।

रिश्ते में इस दूरी को कैसे कम करें?

सवाल पूछने का तरीका बदलें

ऐसे सवाल पूछने से बचें जिनका जवाब सिर्फ “हाँ” या “ना” में दिया जा सके। उदाहरण के लिए “खाना खाया?” पूछने के बजाय “आज तुम्हारा दिन कैसा रहा?” जैसे सवाल पूछें।

इससे बातचीत आगे बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है।

पार्टनर को स्पेस दें

अगर आपका पार्टनर तनाव में है या मानसिक रूप से थका हुआ है, तो उसे थोड़ा समय दें। हर समय तुरंत जवाब की उम्मीद करना रिश्ते पर दबाव बढ़ा सकता है।

जवाब में थोड़ा भावनात्मक जुड़ाव दिखाएं

डॉ. ध्रुति विशेष रूप से पुरुषों को सलाह देती हैं कि केवल “हम्म” या “ओके” लिखने के बजाय दो-चार शब्द और जोड़ें।

जैसे:

  • “अच्छा, फिर क्या हुआ?”
  • “मैं अभी थोड़ा व्यस्त हूं, बाद में आराम से बात करते हैं।”
  • “समझ सकता हूं, यह मुश्किल रहा होगा।”

ऐसे छोटे जवाब भी सामने वाले को यह एहसास दिलाते हैं कि उसकी बात सुनी और समझी जा रही है।

रिश्तों में खामोशी को समझना भी जरूरी

टेक्स्ट मैसेज की दुनिया में कई बार शब्दों से ज्यादा खामोशी बोलती है। हर “हम्म” का मतलब नाराजगी नहीं होता और हर छोटी प्रतिक्रिया रिश्ते के खत्म होने का संकेत भी नहीं होती।

जरूरी यह है कि हम केवल शब्दों को नहीं, बल्कि उनके पीछे छिपी भावनाओं को समझने की कोशिश करें। एक परिपक्व और स्वस्थ रिश्ते की पहचान यही है कि उसमें संवाद केवल बोलकर नहीं, बल्कि समझकर भी किया जाए।

रिश्तों में असली जुड़ाव तब बनता है जब हम सिर्फ जवाब सुनने के लिए नहीं, बल्कि सामने वाले को महसूस करने और समझने के लिए बातचीत करते हैं। “हम्म” के पीछे छिपी खामोशी को गुस्से से नहीं, समझदारी और संवेदनशीलता से पढ़ना ही मजबूत रिश्तों की सबसे बड़ी कुंजी है।

Related Articles

📢 पूरी खबर पढ़ने के लिए

बेहतर अनुभव के लिए ऐप का उपयोग करें

ऐप में पढ़ें
ऐप खोलें
ब्राउज़र में जारी रखें