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बारिश से मिला सोयाबीन की फसल को जीवनदान

किसानों के चेहरे पर रौनक, अब अच्छी फसल होने की उम्मीद

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बारिश से मिला सोयाबीन की फसल को जीवनदान

अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन:काफी दिनों से बारिश नहीं होने के कारण सोयाबीन की फसल लगभग ५० प्रतिशत खराब हो गई। इस वजह से किसानों के चेहरे पर मायूसी छाई हुई थी। किसानों द्वारा शासन से अनुरोध किया जा रहा था कि सर्वे करवाने के बाद तत्काल राहत राशि एवं बीमा राशि दिलवाई जाए, लेकिन बारिश होने से अब सोयाबीन की फसल को जीवनदान मिला है और किसानों के चेहरे पर रौनक लौट आई है।

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उल्लेखनीय है कि उज्जैन जिले में लगभग सवा लाख हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर सोयाबीन की फसल बोई गई है। मालवा अंचल में सबसे ज्यादा सोयाबीन की फसल की जाती है, लेकिन अधिक बारिश और कम बारिश दोनों स्थिति में किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। कई बार इस प्रकार की स्थिति निर्मित हुई है।

काफी दिनों से बारिश नहीं होने के कारण सोयाबीन की फसल खराब हो गई और पीली मौजक के कारण सोयाबीन को फसल को नुकसान हुआ। बड़वाई के किसान पर्वतसिंह पटेल के मुताबिक बारिश होने से सोयाबीन की फसल को जीवन दान मिला है। यदि कुछ दिनों और बारिश हुई तो यह फसल के लिए काफी लाभदायक सिद्ध होगी। विनायगा निवासी संजय आंजना ने बताया कि बारिश होने से किसानों को काफी राहत मिली है यदि बारिश नहीं होती तो काफी नुकसान उठाना पड़ता।

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पीला सोना कहा जाता है

सोयाबीन को मालवांचल में पीला सोना कहा जाता है। उज्जैन सहित आसपास के जिलों में 98 प्रतिशत किसानों द्वारा सोयाबीन की फसल को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके पश्चात अन्य फसल बोई जाती है। जबकि कुछ वर्ष पहले इस मौसम में मूंगफली की फसल की जाती थी।

50 % हो चुका है नुकसान

बारिश नहीं होने के कारण अभी तक सोयाबीन की फसल में लगभग 50 प्रतिशत नुकसान हो चुका है। यदि बारिश नहीं होती तो सोयाबीन की फसल में ज्यादा नुकसान हो सकता था। बारिश होने की कामना करते हुए जगह-जगह उज्जैनी का आयोजन किया गया। इसके अलावा मंदिरों में पूजा-अर्चना की गई। कई जगह पुराने टोटकों का सहारा भी लिया गया।

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