महंगाई से बेहाल ईरान! लोग रोटी भी EMI पर खरीदने को मजबूर, तेल-अंडों की कीमतों में भारी उछाल

ईरान में बढ़ती महंगाई और युद्ध की मार ने आम लोगों की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। तेहरान के 52 वर्षीय सरकारी कर्मचारी मेहदी बताते हैं कि उन्होंने मोहल्ले की दुकान से उधार राशन खरीदा था, लेकिन जब अगले दिन भुगतान करने पहुंचे तो सामान का बिल लगभग दोगुना हो चुका था। उनका कहना है कि महंगाई इतनी तेजी से बढ़ रही है कि वेतन महीने के बीच तक ही खत्म हो जाता है। तेहरान, इस्फहान, अहवाज और मशहद जैसे शहरों में लोगों के बीच अब बमबारी से ज्यादा रसोई और रोजमर्रा के खर्चों की चिंता दिखाई दे रही है।

युद्ध के बाद हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि कई परिवारों को राशन, रोटी और यहां तक कि सुपरमार्केट से खरीदे गए जरूरी सामान भी किस्तों पर लेने पड़ रहे हैं। इजराइल और अमेरिका के हमलों के बाद कुछ लोगों को उम्मीद थी कि ईरानी शासन कमजोर पड़ जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब सरकार के समर्थक और विरोधी दोनों ही युद्ध, महंगाई और भविष्य की अनिश्चितता से परेशान नजर आ रहे हैं। हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि युद्ध के बाद कुकिंग ऑयल की कीमत 430 फीसदी, अंडों की 345 फीसदी, चावल की 287 फीसदी और दूध की कीमत 139 फीसदी तक बढ़ चुकी है।
बातचीत को ही समाधान मान रहे हैं सरकार के आलोचक
युद्ध के लंबे असर ने सरकार विरोधी लोगों की सोच में भी बदलाव ला दिया है। पहले जहां कई लोग संघर्ष को बदलाव का रास्ता मानते थे, वहीं अब बातचीत को देश को बचाने का सबसे व्यावहारिक विकल्प समझा जा रहा है। तेहरान की पर्यावरण विशेषज्ञ लीदा का कहना है कि युद्ध ने ईरान को भारी नुकसान पहुंचाया है। बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है और बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है। उनके अनुसार मौजूदा हालात में संघर्ष नहीं बल्कि बातचीत ही देश के हित में है।
राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि शासन परिवर्तन की उम्मीद रखने वाले लोगों को अब वास्तविक स्थिति का आकलन करना पड़ रहा है। उनकी उम्मीदों के विपरीत मौजूदा सत्ता संरचना अब भी कायम है और यही वजह है कि कई लोग अब टकराव के बजाय संवाद को प्राथमिकता दे रहे हैं।
इंटरनेट शुरू होते ही सामने आईं दर्दनाक कहानियां
युद्ध शुरू होने के साथ ही ईरान में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई थीं। मई के आखिर तक लोग न केवल दुनिया से कटे रहे बल्कि अपने रिश्तेदारों और परिचितों से भी संपर्क नहीं कर सके। जब इंटरनेट सेवाएं दोबारा शुरू हुईं तो लोगों के सामने ऐसी खबरें आईं जिन्होंने पूरे देश को झकझोर दिया।
ऐसी ही एक कहानी हामेद मिर्जाई की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि मार्च में तेहरान के रेसालत स्क्वायर इलाके में हुए एक इजराइली हमले में उनकी पत्नी, माता-पिता समेत परिवार के 12 लोगों की मौत हो गई थी। इंटरनेट बंद होने की वजह से उन्हें इस त्रासदी की जानकारी काफी देर बाद मिल पाई। इंटरनेट बहाल होने के बाद सोशल मीडिया पर टूटे घरों, बिछड़े परिवारों और युद्ध से प्रभावित लोगों की कई दर्दनाक कहानियां सामने आईं।
दवाओं की सप्लाई पर भी संकट गहराया
युद्ध का असर अब केवल महंगाई तक सीमित नहीं है, बल्कि उद्योग और स्वास्थ्य सेवाएं भी इसकी चपेट में आ चुकी हैं। मशहद के नजदीक स्थित एक फैक्ट्री के प्रबंधक ने बताया कि कच्चे माल की कमी के कारण उत्पादन रोकना पड़ा है और कर्मचारियों को छुट्टी पर भेज दिया गया है।
इजराइली हमलों के कारण पेट्रोकेमिकल सेक्टर को भी भारी नुकसान पहुंचा है। वहीं इस्फहान के एक डॉक्टर ने बताया कि कई फार्मेसियां अब दवाएं सीमित मात्रा में उपलब्ध करा रही हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने डॉक्टरों को भी केवल अत्यंत आवश्यक दवाएं लिखने की सलाह दी है ताकि उपलब्ध स्टॉक अधिक समय तक चल सके।
ईरान हीमोफीलिया एसोसिएशन के प्रमुख अमीन अफशार के अनुसार रक्तस्राव संबंधी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए जरूरी दवाओं का भंडार लगभग समाप्त हो चुका है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और सप्लाई चेन की समस्याओं के कारण दवाओं का आयात भी बेहद कठिन हो गया है।
युद्ध से पहले भी आर्थिक संकट झेल रहा था ईरान
मौजूदा युद्ध से पहले ही ईरान गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा था। बढ़ती महंगाई और मुद्रा संकट के विरोध में दिसंबर 2025 में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए थे। विरोध प्रदर्शनों के दबाव के बीच सेंट्रल बैंक के प्रमुख मोहम्मद रजा फरजिन को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
राजधानी तेहरान के सादी स्ट्रीट और ग्रैंड बाजार क्षेत्रों में व्यापारियों और दुकानदारों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए थे। इसके अलावा इस्फहान, शिराज और मशहद जैसे प्रमुख शहरों में भी महंगाई के खिलाफ लोगों ने आवाज उठाई थी।
उस समय ईरानी मुद्रा रियाल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई थी, जिससे खाने-पीने की वस्तुओं और दैनिक जरूरत के सामानों की कीमतों में भारी उछाल आया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 में देश की महंगाई दर 42 प्रतिशत से अधिक थी, जबकि खाद्य पदार्थों की कीमतों में 70 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई थी।









