मेहनत के साथ पुण्य भी होना चाहिए-आचार्यश्री प्रज्ञासागरजी

श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान चतुर्थ दिवस: 64 अघ्र्य श्री सिद्धभगवान की आराधना करते हुये मंडलजी पर चढ़ाए
उज्जैन। धन का एक हिस्सा व्यापार तो एक परिवार, एक परोपकार, एक हिस्सा देश को देना आवश्यक है। धन के जाने में दुख, आने में सुख है, धन के देने में भी सुख है। इसलिए लोग लाखों, करोड़ों रुपये धन दान देते हैं। चारों प्रकार के दान अत्यंत सुख के कारक होते हैं। धन को पाना और देना सुख का कारण है, दुख तो खोने के कारण है। जैसे दुकान का हिसाब बराबर होता है वैसे ही जीवन का हिसाब बराबर होना चाहिए। जिसके जीवन का हिसाब-किताब साफ होता है उसे मृत्यु कभी भी आये वह तैयार रहता हैं। मेहनत से धन, धन से पुण्य कमाओं। मेहनत के साथ पुण्य भी होना चाहिए।
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यह बात आचार्यश्री प्रज्ञा सागर महाराज ने सिद्धचक्र महामंडल विधान के चौथे दिन शांतिनाथ दिगंबर जैन लक्ष्मी नगर में कही। 1 से नवंबर तक चलने वाले विधान में प्रथम दिवस 8, दूसरे दिन 16 एवं गुरुवार को 32 व शुक्रवार को 64 अघ्र्य, श्री सिद्धभगवान की आराधना करते हुये मंडलजी पर जगत के सुख समृद्धि एवं शांति के उद्देश्य से चढ़ाये गये। कार्यक्रम में शुक्रवार को शहर कांग्रेस अध्यक्ष रवि भदोरिया, विधायक महेश परमार, प्रतिपक्ष नेता पार्षद रवि राय, नाना जितेंद्र तिलकर, मनोज त्रिवेदी, आशुतोष शुक्ला, आदेश जैन जिला न्यायाधीश, न्यायाधीश अरविंद जैन, मदन भाई हुमड़ गुजरात विशेष रुप से सम्मिलित हुए। सभी का मंदिर ट्रस्ट कमेटी एवं विधान समिति द्वारा सम्मान किया गया।











