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संभाग का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल हुआ भगवान भरोसे…

9 डॉक्टरों ने नौकरी छोड़ी या आगे की पढ़ाई के लिये गए, 2 का ट्रांसफर हुआ

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उज्जैन। जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के कारण बढ़ती मरीजों की परेशानी किसी से छुपी नहीं है। अब संभाग के सबसे बड़े अस्पताल की हालत यह हो चुकी है कि एक माह में कुल 92-11 डॉक्टर या तो नौकरी छोड़ गये हैं या फिर आगे की पढ़ाई के लिये चले गये हैं। अब गिनती के डॉक्टरों के भरोसे अस्पताल की व्यवस्था संचालित हो रही हैं।

एक ओर शासन द्वारा आमजनों को मुफ्त और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सरकारी अस्पतालों में दिलाने के दावे किये जाते हैं, वहीं दवाओं और मरीजों की सुविधाओं के लिये करोड़ों रुपए खर्च किये जा रहे हैं तो दूसरी ओर संभाग के सबसे बड़ा अस्पताल ही वर्तमान में भगवान भरोसे चल रहा है। एक माह में कुल 11 डॉक्टर अस्पताल छोड़कर जा चुके हैं जबकि दो डॉक्टरों का अन्यत्र ट्रांसफर कर दिया गया है। इसके कारण मरीजों को उपचार कराने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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दो डॉक्टरों का हो गया ट्रांसफर

हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. देवेश पांडे का जिला अस्पताल में हड्डी रोग विभाग प्रभारी डॉ. महेश मरमट से विवाद और मारपीट होने के बाद डॉ. पांडे का माधव नगर अस्पताल में ट्रांसफर कर दिया गया है, जबकि डॉ. अजय दिवाकर का अज्ञात कारणों के चलते मंदसौर ट्रांसफर कर दिया गया है।

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कौन डॉक्टर कहां गया

  • डॉ. मनोज शाक्य 2 वर्ष के लिये निश्चेतना का कोर्स करने इंदौर गये।
  • डॉ. शुभांशी द्विवेदी 2 वर्ष के लिये निश्चेतना का कोर्स करने देवास गई
  • डॉ. नितेश अडवाकर एमडी मेडिसीन की पढ़ाई के लिये रतलाम गये
  •  डॉ. अजय अत्रोलिया सांवेर गये
  • डॉ. शहनाज खान गायनिक की पढाई के लिये सागर गईं
  • इनके अलावा डॉ. गुरूचरण सिंह, डॉ.नवनीता, डॉ. मुस्कान अग्रवाल, डॉ. दीक्षा जैन, डॉ. सोनी व एक अन्य डॉक्टर जो एक वर्ष के लिये बांड पर जिला अस्पताल में सेवाएं दे रहे थे वह भी पोस्ट ग्रेज्युएशन में सिलेक्शन होने पर नौकरी छोड़कर चले गये।

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