Advertisement

सोम प्रदोष में भक्तों की भीड़, सोम यज्ञ भी जारी

3 अप्रैल से 30 मई तक चलेगा मटकियों से जल अर्पण का क्रम

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe

Advertisement

उज्जैन। सोमवार को सोम प्रदोष पर भगवान महाकाल के दर्शन के लिए काफी संख्या में दर्शनार्थी मंदिर पहुंचे। इसी बीच महाकाल मंदिर में सोम यज्ञ का दौर लगातार जारी है।

सोमवार को सोम प्रदोष के मौके पर भगवान महाकाल का भी सुबह के वक्त उपवास रहा। उन्हें भोग में सिर्फ दूध अर्पित किया गया। सुबह 11 पंडितों ने एकादश-एकादशिनी पूजन किया। प्रदोष पर दर्शन के लिए दूर-दूर से दर्शनार्थी मंदिर पहुंचे। इस कारण मंदिर में दर्शनार्थियों की भीड़ बढ़ गई। वहीं अन्नक्षेत्र परिसर मेें बेहतर वर्षा और जन-कल्याण की कामना के साथ सोमयज्ञ चल रहा है। अक्षय कृषि परिवार एवं महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित छह दिवसीय सोमयज्ञ 2 अप्रैल तक चलेगा।

Advertisement

वैदिक मंत्रोच्चार के साथ देवताओ को प्रसन्न करने के लिए यहां सोमवल्ली वनस्पति से आहूतियां दी जा रही हैं। पहाडिय़ों से लाई गई इस दुर्लभ वनस्पति से तैयार किए गए सोमरस की आहुति प्रवग्र्य विधि से दी जाती है। इस यज्ञ का उद्देश्य न केवल धार्मिक है, बल्कि वैज्ञानिक भी है। यज्ञ के दौरान होने वाले पर्यावरणीय परिवर्तनों और वायु गुणवत्ता में सुधार को मापने के लिए यज्ञशाला के समीप अत्याधुनिक वैज्ञानिक यंत्र भी स्थापित किए गए हैं। मान्यता है कि सोमयज्ञ से न केवल उत्तम वर्षा और खाद्यान्न की प्राप्ति होती है, बल्कि पूरी प्रजा में खुशहाली आती है।

पूर्णिमा से बंधेगी गलंतियां

Advertisement

बढ़ती तपिश के बीच भगवान महाकालेश्वर को शीतलता प्रदान करने के लिए प्राचीन गलंतिका पूर्णिमा 3 अप्रैल से बांधी जाएगी। पूर्णिमा से वैशाख माह शुरू हो जाएगा। वैशाख और ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी के दौरान भगवान महाकाल के शीश पर मिट्टी की मटकियों से निरंतर शीतल जल की धारा प्रवाहित की जाएगी। मंदिर प्रबंध समिति और पुजारियों द्वारा इसकी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। गलंतिका बांधने की शुरुआत वैशाख कृष्ण प्रतिपदा यानी 3 अप्रैल से होगी, जो ज्येष्ठ पूर्णिमा 30 मई तक अनवरत जारी रहेगी। रोज सुबह पूजन-अर्चन के बाद पवित्र नदियों के जल का आह्वान कर मटकियां बांधी जाएंगी। दोपहर 4 बजे तक इन मटकियों से भगवान के शीश पर बूंद-बूंद शीतल जल बरसता रहेगा।

Related Articles

Write a review