स्कूलों की मनमानी पर चला कलेक्टर का डंडा, ड्रेस और किताबों के नाम पर नहीं कर सकेंगे जेब खाली

धारा 163 लागू : निजी स्कूलों में 3 साल तक नहीं बदलेगी ड्रेस, 15 जून तक किताबें खरीदने की छूट, शिकायत के लिए नंबर जारी
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उज्जैन। निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों की जेब ढीली करने के खेल पर जिला प्रशासन ने पूरी तरह लगाम लगा दी है। नए आदेश के अनुसार, स्कूल संचालकों को परीक्षा परिणाम घोषित होने से पहले अनिवार्य पुस्तकों की सूची विद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी और नोटिस बोर्ड पर चस्पा करना अनिवार्य होगा। साथ ही, प्रवेश के समय अभिभावकों को यह सूची उपलब्ध करानी होगी।
कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 (1) के तहत सख्त आदेश जारी कर प्रकाशकों, विक्रेताओं और स्कूल संचालकों के गठजोड़ को तोडऩे के निर्देश दिए हैं। अब कोई भी स्कूल अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से सामग्री क्रय करने के लिए मजबूर नहीं कर पाएगा। अभिभावकों को पुस्तकें खरीदने के लिए 15 जून तक का समय दिया गया है। अप्रैल महीने में केवल ओरिएंटेशन और व्यावहारिक शिक्षण होगा।
एनसीईआरटी की किताबें अनिवार्य
आदेश के मुताबिक स्कूल केवल अधिकृत एजेंसी जैसे एनसीईआरटी या पाठ्य पुस्तक निगम की पुस्तकें ही चला सकेंगे। निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें थोपना प्रतिबंधित होगा। कोई भी विक्रेता पूरी किताब का सेट खरीदने के लिए दबाव नहीं बनाएगा। विद्यार्थी अपनी आवश्यकतानुसार एकल पुस्तकें भी खरीद सकेंगे।
यूनिफॉर्म मेें 3 साल तक नहीं होगा बदलाव
अभिभावकों को बड़ी राहत देते हुए कलेक्टर ने आदेश दिया है कि स्कूल प्रशासन अधिकतम दो यूनिफॉर्म ही निर्धारित कर सकेगा। स्कूल ड्रेस में कम से कम तीन शैक्षणिक सत्रों तक कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा, वार्षिकोत्सव या किसी विशेष आयोजन के लिए नई वेशभूषा खरीदने हेतु पालकों को बाध्य करना दंडनीय अपराध माना जाएगा।
कमांड कंट्रोल रूम में करें शिकायत
यदि कोई स्कूल या विक्रेता इन नियमों की अवहेलना करता है, तो उसके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने पर प्राचार्य के साथ-साथ बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स पर भी गाज गिरेगी। आमजन उल्लंघन की जानकारी कमांड कंट्रोल रूम के फोन नंबर 0734-2520711 पर दे सकते हैं।










