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हमजा बुरहान हत्याकांड में आरोपी गिरफ्तार, हथियार बरामद, 2 संदिग्ध फरार

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद में एक बड़ी घटना सामने आई है। 2019 के पुलवामा आतंकी हमले में शामिल रहे कुख्यात आतंकी हमजा बुरहान की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस मामले में मुजफ्फराबाद के काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट ने वाह कैंट निवासी एक संदिग्ध को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। गिरफ्तारी के दौरान आरोपी के पास से हथियार भी बरामद हुआ है, जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यही हथियार वारदात में इस्तेमाल हुआ था या कोई और।

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सूत्रों के मुताबिक घटना के वक्त दो और संदिग्ध मौके पर मौजूद थे, जो मौका पाते ही फरार हो गए। सुरक्षा एजेंसियां उनकी तलाश में लगी हुई हैं।

सिर में तीन गोलियां, अस्पताल में तोड़ा दम

न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार हमजा बुरहान पर गुरुवार को मुजफ्फराबाद के AIMS कॉलेज के बाहर अज्ञात हमलावरों ने अंधाधुंध गोलियां बरसाईं। इनमें से तीन गोलियां उसके सिर में लगीं। गंभीर हालत में उसे नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। बाद में उसे इस्लामाबाद के बर्मा टाउन स्थित एक स्थान पर सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

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कौन था हमजा बुरहान?

हमजा बुरहान जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के रत्नीपोरा इलाके का रहने वाला था। महज 23 साल की उम्र में वह आतंकी संगठन अल बद्र में शामिल हो गया था, जिसे सरकार आतंकी संगठन घोषित कर चुकी है। वह कानूनी तरीके से पाकिस्तान गया और वहां जाकर पहले अल बद्र का सक्रिय सदस्य बना, फिर धीरे-धीरे कमांडर के पद तक पहुंच गया। बाद में वह अल बराक के लिए भी काम करने लगा।

भारत सरकार ने 2022 में उसे UAPA के तहत घोषित आतंकवादी करार दिया था। वह कई खतरनाक आतंकियों का करीबी सहयोगी माना जाता था और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से भी उसके गहरे संबंध बताए जाते थे। मुजफ्फराबाद के चीला बांदी इलाके में वह कमांडो सुरक्षा, बुलेटप्रूफ गाड़ी और एस्कॉर्ट वाहन के साथ रहता था।

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जांच एजेंसियों के मुताबिक वह युवाओं को आतंकी संगठनों में भर्ती कराने और फंडिंग का काम भी करता था। 2020 में कश्मीर के काकापोरा इलाके में CRPF बंकर पर हुए ग्रेनेड हमले में भी उसकी भूमिका सामने आई थी, हालांकि उस हमले में ग्रेनेड निशाने से चूककर सड़क पर फटा था जिससे 12 नागरिक घायल हुए थे।

पुलवामा का वह काला दिन जो देश कभी नहीं भूलेगा

14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में श्रीनगर-जम्मू हाईवे पर लेथपोरा के पास CRPF के काफिले को निशाना बनाया गया था। जैश-ए-मोहम्मद के एक आतंकी ने विस्फोटकों से भरी SUV को बसों से टकरा दिया। धमाका इतना भीषण था कि दो बसें पूरी तरह तबाह हो गईं और 40 जवान शहीद हो गए। बाद में राष्ट्रीय जांच एजेंसी NIA ने अपनी चार्जशीट में जैश-ए-मोहम्मद और उसके सरगना को इस हमले का मास्टरमाइंड बताया।

चार महीने में पाकिस्तान में चार बड़े आतंकी ढेर

हमजा बुरहान की मौत कोई अकेली घटना नहीं है। पिछले चार महीनों में पाकिस्तान की सरजमीं पर चार बड़े और खूंखार आतंकी संदिग्ध परिस्थितियों में मारे जा चुके हैं। हर मामले में अज्ञात हमलावरों का हाथ बताया गया है और किसी की भी आधिकारिक पुष्टि पाकिस्तान सरकार की ओर से नहीं हुई।

फरवरी 2026 — पेशावर: लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक आतंकी को पेशावर में अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मारकर खत्म कर दिया। भारत सरकार ने 2024 में उसे UAPA के तहत घोषित आतंकी करार दिया था। वह जम्मू-कश्मीर में नए आतंकी मॉड्यूल तैयार करने, हथियार और फंडिंग पहुंचाने जैसे कामों में सक्रिय था।

अप्रैल 2026 — बहावलपुर: जैश-ए-मोहम्मद के एक सीनियर कमांडर को बहावलपुर में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। कुछ रिपोर्ट्स इसे हिट-एंड-रन बताती हैं तो कुछ टारगेट किलिंग। वह जैश सरगना का करीबी माना जाता था और संगठन के ऑपरेशनल नेटवर्क से जुड़ा था। गौरतलब है कि बहावलपुर लंबे समय से जैश का प्रमुख गढ़ माना जाता रहा है।

अप्रैल 2026 — खैबर पख्तूनख्वा: लश्कर-ए-तैयबा के एक कमांडर को खैबर पख्तूनख्वा में अज्ञात हमलावरों ने मार गिराया। वह संगठन के लॉजिस्टिक्स और संचार नेटवर्क को संभालता था और हाफिज सईद का करीबी बताया जाता था।

मई 2026 — इस्लामाबाद: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हिजबुल मुजाहिदीन के एक सीनियर कमांडर को अज्ञात हमलावरों ने निशाना बनाया। मूल रूप से कश्मीर के बारामूला का रहने वाला यह आतंकी 1990 के दशक के अंत में पाकिस्तान चला गया था, जहां उसने ट्रेनिंग ली और बाद में फंडिंग, ट्रेनिंग और नेटवर्किंग जैसे अहम काम संभालने लगा। पाकिस्तान सरकार ने इस मामले पर भी कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया।

इन लगातार हो रही घटनाओं ने पाकिस्तान में पल रहे आतंकी नेटवर्क को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है — और दुनिया की नजरें अब इस पर टिकी हुई हैं।

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