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17 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंची उज्जैन की सांस्कृतिक गूंज

विक्रमोत्सव ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रचा इतिहास

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उज्जैन। विक्रमोत्सव 2026 के प्रसारण ने डिजिटल आउटरीच और कम्युनिटी एंगेजमेंट के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, 7 फरवरी से 24 मार्च 2026 के बीच इस आयोजन की कुल डिजिटल रीच 17.72 करोड़ से अधिक दर्ज की गई है। सोशल मीडिया और जनभागीदारी के इस अद्भुत समन्वय ने उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर एक नई मजबूती प्रदान की है। महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ के निदेशक डॉ. श्रीराम तिवारी के अनुसार, यह आयोजन परंपरा और तकनीक के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है।

आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स और लाइव स्ट्रीम्स के माध्यम से जहाँ 47.85 लाख लोगों तक पहुंच बनी, वहीं आमजन द्वारा तैयार किए गए कंटेंट और विभिन्न हैशटैग्स के जरिए 17.24 करोड़ से अधिक की रिकॉर्ड डिजिटल रीच हासिल हुई। आयोजन से संबंधित 300 से अधिक आधिकारिक पोस्ट्स और जनता द्वारा साझा किए गए 4500 से अधिक पोस्ट्स ने इस उत्सव को डिजिटल रूप से अत्यंत सफल बनाया। विशेष रूप से विक्रमोत्सव 2026 ने अकेले 2.7 करोड़ से अधिक लोगों तक अपनी पहुंच बनाकर डिजिटल ट्रेंड्स में अग्रणी स्थान प्राप्त किया। इसके अलावा विक्रमोत्सव और जय महाकाल जय विक्रम जैसे हैशटैग्स ने भी करोड़ों की रीच हासिल की।

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सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और व्यापार मेले की सफलता

मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस उत्सव में संगीतकार प्रीतम, विशाल मिश्रा और अन्य युवा कलाकारों की प्रस्तुतियों ने बड़ी संख्या में दर्शकों को आकर्षित किया। उत्सव के अंतर्गत अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, अनादि पर्व और पांच दिवसीय वन मेले का सफल आयोजन किया गया। साथ ही, विक्रमोत्सव के तहत आयोजित व्यापार मेले में वाहनों की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की गई, जिसने आर्थिक मोर्चे पर भी इतिहास रचा।

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वाराणसी में गूंजेगी सम्राट विक्रमादित्य की वीरगाथा

उज्जैन, भोपाल, आगरा और हैदराबाद की सफलता के बाद, अब उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी में 3 से 5 अप्रैल 2026 तक महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य का मंचन किया जाएगा। यह आयोजन सम्राट विक्रमादित्य की वीरता, न्यायप्रियता और उनकी नवरत्न परंपरा को जन-जन तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उल्लेखनीय है कि अप्रैल 2025 में दिल्ली के लाल किले पर हुए इस महानाट्य के मंचन की प्रशंसा स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी की थी।

वैश्विक पहचान और वैदिक घड़ी
भारतीय ज्ञान परंपरा को पुन:स्थापित करने के लिए उज्जैन में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की स्थापना और उसका 189 से अधिक भाषाओं वाला ऐप वैश्विक स्तर पर सराहा जा रहा है। मध्यप्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा से शासकीय कैलेंडर में विक्रम संवत को अंगीकार कर भारतीय कालगणना को विशेष सम्मान दिया है। फिलहाल 30 जून तक जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत विक्रमोत्सव की गतिविधियां जारी रहेंगी।

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