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64 करोड़ से संवरेगा शिप्रा रिवर फ्रंट

बैरियर फ्री रैम्प, रैलिंग, हाईटेक लाइटिंग होगी, पत्थर की शैली में बनेंगी छत्रियां, मंडप और मेहराब

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सिंहस्थ 2028 की तैयारियां के तहत अब शिप्रा नदी के घाटों को रिवर फ्रंट के रूप में विकसित किया जाएगा। इसे विकसित करने के लिए 64.24 करोड़ की परियोजना को प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है। फिलहाल ठेकेदार चयन की प्रक्रिया जारी है। नगर निगम द्वारा वॉटर रिजुवेनेशन प्रोजेक्ट के तहत तैयार इस परियोजना में नदी तटों का संरक्षण, घाटों का पुनर्विकास और आधुनिक जनसुविधाओं का निर्माण किया जाएगा ताकि सिंहस्थ से पहले श्रद्धालुओं को सुरक्षित और व्यवस्थित घाट उपलब्ध हो सकें।

परियोजना का मूल फोकस शिप्रा के पारिस्थितिक संतुलन को सुधारते हुए उसकी धार्मिक गरिमा को संरक्षित करना है। योजना के मुताबिक 9 किमी लंबे पुराने घाटों की मरम्मत कर पारंपरिक पत्थर की शैली में छत्रियां, मंडप, मेहराब और शेड बनाए जाएंगे। नदी के किनारों पर लैंडस्केपिंग, हरित बफर जोन और पैदल प्रोमोनेड विकसित कर घाटों को एकीकृत रिवर फ्रंट का स्वरूप दिया जाएगा। इसके अलावा सीनियर सिटीजन्स और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए रैम्प, रैलिंग और बैरियर फ्री पहुुंच मार्ग बनाए जाएंगे जिससे भीड़ के दौरान भी सुरक्षित और आसान आवाजाही हो सके।

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शासन का लक्ष्य है कि सिंहस्थ काफी पहले प्रमुख घाटों का ढांचा तैयार हो जाए। निर्माण के बाद संबंधित एजेंसी को पांच सालों तक संचालन और रखरखाव करना होगा। शुरुआत दो वर्ष डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड होंगे जिसमें किसी भी प्रकार की तकनीकी कमी की जवाबदेही एजेंसी की रहेगी। गुणवत्ता नियंत्रण, सुरक्षा मानक और पर्यावरण से संबंधित निर्देशों का अनिवार्यत: पालन करना होगा। इस काम को पूरा करने की समयसीमा १८ माह रखी गई है। आपको बता दें कि पिछले दिनों उज्जैन आए नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे ने बैठक लेकर अधिकारियों को योजना को तेजी से जमीन पर उतारने के निर्देश भी दिए थे।

जरूरतों के मुताबिक योजना

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इस परियोजना में क्राउड मैनेजमेंट, कचरा निस्तारण, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा तंत्र को विशेष रूप से शामिल किया है। घाटों पर हाईमास्ट, सर्च लाइट, चेतावनी सायरन, गार्ड रूम और पेयजल सुविधाएं भी होंगी। इससे करोड़ों श्रद्धालुओं की आवाजाही के दौरान दुर्घटना जोखिम कम होगा और घाटों पर ठहराव की क्षमता बढ़ेगी। रिवर फ्रंट बनने के बाद केवल धार्मिक स्थल नहीं बल्कि सांस्कृतिक एवं पर्यटन के रूप में भी विकसित होगा।
सुंदर प्रोमोनेड, बैठने की व्यवस्था और हरित क्षेत्र शहरवासियों के लिए भी सार्वजनिक स्पेस का काम करेंगे। सभी कामों के पूरा होने के बाद धार्मिक पर्यटन और मजबूत होगा।

प्रोजेक्ट एक नजर में

 पुराने घाटों का पत्थर से पुनर्विकास और संरचनात्मक मजबूती

नदी किनारे प्रोमोनेड, लैंडस्कैपिंग, ग्रीन बफर झोन

बैरियर फ्री रैम्प, सुरक्षा रैलिंग, छत्रियां, मंडप, मेहराब और शेड

हाईमास्ट, सर्च लाइट, चेतावनी सायरन एवं गार्ड रूम

पेयजल, क्राउड मैनेजमेंट और पहुंच मार्ग की सुविधा

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