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9 जनवरी को है साल की पहली सफला एकादशी, जानें महत्त्व, पूजा विधि

नए साल की पहली एकादशी 9 जनवरी को है। पौष मास कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को सफला एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन नियमपूर्वक व्रत रखने तथा श्री हरि की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। श्री हरि के साथ ही देवी लक्ष्मी भी प्रस्न होकर अपनी कृपा बरसाती हैं। शास्त्रों में उल्लेख है कि Saphala Ekadashi का व्रत रखने तथा विधि विधान से आराधन करने से सभी कार्यों में सफलता मिलता है, लंबी आयु तथा अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है और भौतिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति होती है।

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सफला एकादशी की पूजा विधि

एकादशी के दिन पवित्रता का बड़ा महत्व होता है। शरीर के साथ ही मन की भी शुद्धि होती है। सूर्योदय से पूर्व स्नान करें। पूरे घर की और खासतौर पर पूजा घर की सफाई करे। पूरे घर में गंगा जल का छिड़काव करें। इसके बाद श्री हरि तथा माता लक्ष्मी की तस्वीर की पूज करें। पूजा में केले के पत्ते विशेष रूप से शामिल करें। पूजा के बाद श्री हरि को पंचामृत, पुष्प और ऋतु फल अर्पित करें। दिनभर व्रत रखें। फलाहार का सेवन कर सकते हैं।

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सफला एकादशी पर दान का महत्व

इन दिन दान का विशेष महत्व है। संभव हो तो दीपदान जरूर करें। मान्यता है कि विवाह संबंधी बाधाओं को दूर करने के लिए एकादशी के दिन केसर, केला तथा हल्दी का दान करना चाहिए। वहीं गर्म कपड़े या कंबल दान कर सकते हैं। सफला एकादशी के दिन किया गया दान व्यर्थ नहीं जाता है। एकादशी का उपवास रखने तथा दान करने से धन, मान-सम्मान और संतान सुख की प्राप्ति होती है।

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इस दिन चावल का सेवन बिल्कुल न करें। पूरी तरह से ब्रह्नाचार्य का पालन करें। किसी से विवाद न करें। किसी को बुरे शब्द न कहें। मन में उत्तेजना न आने दें। घर और परिवार में शांति बनाए रखें। सूर्योदय से पूर्व जागें तथा शाम के समय न सोएं।

सफला एकादशी पर करें इन मंत्रों का जाप

  • 1. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय (108 बार जाप करें)
  • 2. ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीवासुदेवाय नमः (108 बार जाप करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होंगी।
  • 3. ॐ नमो नारायणाय (संतान प्राप्ति के लिए इस मंत्र का जाप करें)

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