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श्री महाकाल महालोक में स्थापित होंगी पत्थर और मेटल की 92 प्रतिमाएं

संभागायुक्त-कलेक्टर ने प्रतिमा निर्माण कार्यशाला एवं निर्माणाधीन सड़क और ब्रिज कार्यों का किया निरीक्षण

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। श्री महाकालेश्वर महालोक में 92 पत्थर एवं मेटल की प्रतिमाओं की स्थापना की जाएगी। शुक्रवार को संभागायुक्त आशीष सिंह और कलेक्टर रौशनकुमार सिंह प्रतिमा निर्माण वर्कशॉप में पहुंचे और निर्माण कार्य की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने सिंहस्थ निर्माण कार्य का मुआयना भी किया। दोनों ने काम की गति और क्वालिटी पर खास तौर पर फोकस करने का कहा।

दरअसल, संभागायुक्त एवं कलेक्टर विक्रमनगर मार्ग स्थित प्रतिमा निर्माण कार्यशाला पहुंचे थे। अफसरों ने उन्हें बताया कि श्री महाकाल महालोक के लिए 92 प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। इनमें 35 पत्थर और 57 मेटल की रहेंगी। प्रतिमा बनाने से पहले स्केच विशेषज्ञों की समिति पास करती है और फिर उसी अनुसार प्रतिमाओं को ढाला जाता है। यह प्रतिमाएं पुराणों में वर्णित स्वरूप एवं साक्ष्यों के आधार पर तैयार हो रही हंै। प्रतिमा बनाने का काम तीन जगह हो रहा है। उज्जैन, ग्वालियर एवं जयपुर में प्रतिमा बनाई जा रही हैं। अफसरों ने कारीगरों के आराम के लिए शेड, पेयजल और अन्य सुविधाओं को जुटाने का कहा।

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डी-मार्ट के सामने बन रही 18 मीटर चौड़ी सड़क- अफसरों ने डी मार्ट के सामने बन रही नई सड़क का काम भी देखा। यह सड़क 900 मीटर लंबी रहेगी। इसकी चौड़ाई 18 मीटर रहेगी। एजेंसी इंजीनियरों को बारिश सीजन खत्म होने के बाद तेजी से सड़क का काम पूरा करने का कहा गया। इस दौरान निर्माण कार्य की क्वालिटी का खास ध्यान रखने और पैरामीटर अनुसार काम करने पर जोर दिया गया। बारिश के पानी की निकासी की प्रभावी व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए। संभागायुक्त-कलेक्टर ने शिप्रा नदी पर बन रहे पुल को भी देखा। ब्रिज निर्माण में तेजी और गुणवत्ता पर खास फोकस रखने का कहा गया।

कोठी पैलेस बिल्डिंग की फर्श में आ रही नमी
उज्जैन। उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड की सीईओ नेहा जैन कौशिक ने शुक्रवार को वीर भारत संग्रहालय का रेस्टोरेशन देखा। भवन के फर्श में नमी आ रही है। उन्होंने ठेकेदार को साइट की साफ-सफाई, डिस्मेंटलिंग सामग्री शिफ्ट करने और फ्लोरिंग में नमी की वजह तलाशने के निर्देश दिए। भवन की ड्रेनेज लाइन की जांच और उसे चालू करने, ओपन ड्रेन्स में सुधार करने का भी कहा। यह सभी काम ७ दिन में पूरे करने होंगे। अधीक्षण यंत्री आरके जैन ने भवन की नीव की स्थिरता जांच के लिए 1 से 1.5 मीटर गहरा पिट बनाने का प्रपोजल दिया। सीईओ ने सभी निर्माण एवं रेस्टोरेशन काम की गति एवं क्वालिटी पर विशेष ध्यान देने पर जोर दिया।

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