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हरिफाटक ओवरब्रिज बनेगा फोरलेन, मकान और होटलों को हटाने की बड़ी चुनौती

एमपीआरडीसी ने तैयार की 259 करोड़ की डीपीआर, रेलवे को भेजेंगे

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा सिंहस्थ योजना के तहत हरिफाटक ओवरब्रिज के लिए 259 करोड़ रुपए का बजट देने के बाद इसके फोरलेन बनने की राह साफ हो गई है। इसका काम शुरू होने में अभी वक्त लग सकता है। चौड़ीकरण के लिए मकान और होटलों को हटाने की बड़ी चुनौती होगी। हालांकि इसके लिए मुआवजे का प्रावधान किया गया है।

हरिफाटक ब्रिज के चौड़ीकरण के लिए एमपीआरडीसी ने 259 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार की है। इसका सर्वे दिल्ली की एलएंडटी कंपनी को सौंपा गया था। यह कंपनी बड़े पुल बनाने और उसके सर्वे करने में एक्सपर्ट है। इसकी डीपीआर भी इसी कंपनी द्वारा तैयार की गई है।

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सूत्रों के अनुसार एमपीआरडीसी यह प्रोजेक्ट पहले रेलवे को भेजेगी। रेलवे की हरी झंडी मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। हरिफाटक ब्रिज की लंबाई बढ़ाकर हरिफाटक क्षेत्र में चौराहे पर ट्रैफिक कंट्रोल के उपाय भी किए जाएंगे। सबसे बड़ी चुनौती चौड़ीकरण की जद में आ रहे मकानों और होटलों को हटाने की रहेगी। यह ब्रिज महाकाल मंदिर के नीलकंठ प्रवेश द्वार को जोड़ेगा। इस कारण यह सिंहस्थ के लिए उपयोगी है और आसपास की जमीन महाकाल वन क्षेत्र की थी। बाद में अवैध रूप से कालोनियां विकसित हो गईं। ब्रिज बनने से महाकाल मंदिर आने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए सुविधा होगी और ट्रैफिक जाम के हालात भी नहीं बनेंगे। सिंहस्थ की दृष्टि से यह उपयोगी है।

डीपीआर तैयार कराई है
हरिफाटक ओवरब्रिज चौड़ीकरण के लिए डीपीआर तैयार कराई गई है। एलएंडटी कंपनी से इसका सर्वे भी हो चुका है।
आरके जैन, संभागीय महाप्रबंधक एमपीआरडीसी इंदौर

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हरिफाटक ओवरब्रिज का चौड़ीकरण मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट है। पिछले सिंहस्थ में भी उन्होंने ब्रिज चौड़ीकरण के लिए प्रस्ताव रखा था। यह ब्रिज उनकी विधानसभा क्षेत्र में ही है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रशासन ने योजना बनाई। पहले यह काम लोक निर्माण विभाग को सौंपा गया था, लेकिन कुछ समय पहले ही इसे एमपीआरडीसी को सौंपा गया है।

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