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तिथि को मानकर भक्त दो दिन पहले चले यात्रा पर

नागचंद्रेश्वर मंदिर पहुंचकर नारियल अर्पित किया, दर्द और बुखार की गोलियां भी साथ ले गए

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। पंचांग की तिथि को मानकर ग्रामीण पंचकोशी यात्रा के लिए बड़ी संख्या में उज्जैन पहुंच गए और पटनी बाजार स्थित भगवान नागचंद्रेश्वर से बल प्राप्त कर अपनी यात्रा शुरू कर दी। हालांकि पुलिस प्रशासन को इस स्थिति का पूर्व से अनुमान था इस कारण तैयारियां निर्धारित दिनांक से दो दिन पूर्व की तैयारियां सुनिश्चित कर ली गईं।

 

सैकड़ों की संख्या में प्रदेश भर के ग्रामीणों का देर रात से ही उज्जैन आना शुरू हो चुका था। सुबह शिप्रा नदी में स्नान के बाद हर उम्र वर्ग के महिला, पुरुष पटनी बाजार स्थित भगवान नागचंद्रेश्वर के मंदिर पहुंचे। यहां लोगों ने भगवान को नारियल अर्पित कर बल मांगा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा मंदिर के बाहर ही डॉक्टर्स व अन्य मेडिकल स्टाफ को तैनात किया है। लोगों ने यहां से दर्द और बुखार की दवाएं एडवांस में लेकर रख लीं और निकल पड़े 118 किलोमीटर की पंचकोशी यात्रा के लिए।

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सिर पर पोटली और हाथ में लकड़ी
पंचकोशी यात्रा में बच्चों से लेकर वृद्ध तक महिला-पुरुष शामिल होते हैं। धार्मिक महत्व की यात्रा में शामिल इन लोगों के सिर पर कपड़े, भोजन आदि की पोटली होती है। हाथों में लकड़ी का सहारा लेकर लोग अपनी यात्रा पर निकलते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं की टोली में ढोलक, मंजीरे, झांझ बजाने वाले रास्ते भर भजन, कीर्तन करते चलते हैं और पड़ाव स्थल पर पहुंचकर आराम, भोजन के बाद भजनों की धुन पर नृत्य भी करते हैं।

पानी, फल, भोजन देकर कमाते पुण्य लाभ
हजारों यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था के साथ अन्य आवश्यकताओं के लिए शासन द्वारा व्यवस्थाएं की गई हैं वहीं दूसरी ओर यात्रा मार्ग के रहवासी, स्वयंसेवी संगठन भी यात्रियों के लिए पेयजल, भोजन, नाश्ता, फल आदि वितरित कर पुण्य लाभ कमाते हैं। दो दिन पहले शुरू हुई पंचकोशी यात्रा के अधिकांश मार्ग पर लोगों ने टेंट लगाकर छाया का प्रबंध किया है वहीं ठंडे पानी, छाछ आदि का वितरण भी किया जा रहा है।

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सात दिन की होती थी यात्रा
पंचकोशी यात्रा में शामिल 70 वर्षीय मांगूलाल परिहार से जब पूछा कि पंचकोशी यात्रा तो 23 अप्रैल से शुरू होना है, आप लोग अभी से यात्रा पर क्यों जा रहे हैं तो उन्होंने बताया कि यात्रा तिथि के अनुसार होती है। पहले यह यात्रा 7 दिनों की होती थी। अब लोग पांच दिन की यात्रा करने लगे हैं। हम तो तिथि के अनुसार ही यात्रा करेंगे इसलिए दो दिन पहले से निकल रहे हैं।

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