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इंदौर-उज्जैन मार्ग पर जाम से निजात नहीं वाहनों की रोजाना लग रही हैं लंबी कतारें

सडक़ पर निर्माणसे उड़ रही है धूल

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करीब एक दर्जन बनाए हैं डायवर्शन

रास्ते में पुलिस के कोई इंतजाम नहीं

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अव्यवस्था के बाद भी वसूल रहे टोल

उज्जैन। इंदौर-उज्जैन मार्ग की हालत इन दिनों ठीक नहीं है। यदि आप इंदौर जाने की योजना पूर्व की स्थिति के अनुसार बना रहे हैं तो भूल जाइए। पहले इंदौर जाने में अधिकतम ४५ मिनट का समय लगता था। अब कितना लगेगा यह तय नहीं है। रास्ते में आपको जाम का सामना करना पड़ेगा। यदि आपने जरा सी असावधानी बरती तो हो सकता है कि रोजाना तेज गति से दौडऩे वाली बसें आपकी गाड़ी को छूती हुई चली जाएं या ठोक भी दें। टोल पर आपको लंबे समय तक कतार में लगना होगा। आपकी गाड़ी का पेट्रोल और डीजल पर ज्यादा खर्च होगा।

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इंदौर-उज्जैन मार्ग पर पर जाम शुरुआत त्रिवेणी से ही हो जाती है। यहां एक ही पुल से आना-जाना हो रहा है। यदि किसी वाहन चालक ने उधर से अपना वाहन आपकी दिशा में मोड़ दिया तो समझ लीजिए कि आप आगे नहीं बढ़ सकते। ऐसा रोजाना हो रहा है। आप त्रिवेणी से आगे बढ़ेंगे तो रास्तें ढाबों के सामने वाहनों की मनमानी कतार देखने को मिलेगी। यह वाहन ढाबों के आंतरिक हिस्से यानी उनके पार्किंग स्थल पर होना चाहिए, लेकिन यहां देखने वाला कोई नहीं है। आगे आपको डायवर्शन मिलेगा। बस यहीं से परेशानी दोहरी हो जाती है जो इंदौर जाने तक रहती है।

सबसे ज्यादा दिक्कत आती है रात्रि के समय
उज्जैन-इंदौर के बीच यात्रा करने वालों को सबसे ज्यादा दिक्कत रात में आती है। डायवर्शन के कारण सिंगल रोड पर गाड़ी चलाना पड़ती है, ऐसे में कई बार सामने से गलत दिशा में वाहन आ जाते हैं जिससे हादसे का डर बना रहता है। इंदौर-उज्जैन के बीच डेढ़ सौ से ज्यादा स्थानीय बसें चलती हैं जिन्हें समय पर अपने स्थान पर पहुंचना होता है। प्रतिस्पर्धी वाहन चालक गति पर लगाम नहीं रखते, जिसका खामियाजा निजी वाहन चालकों को उठाना पड़ता है। कई बार इस मार्ग पर कई बार विवाद भी हुए हैं। अब देखना है कि प्रशासन इस मामले में क्या निर्णय लेता है।

सिक्स लेन सौगात है, लेकिन इनकी वजह से परेशानी का सबब भी
प्रदेश सरकार ने सिंहस्थ को देखते हुए सिक्स लेन की योजना को अमलीजामा पहनाया है। यह प्रदेश के लिए सौगात है, लेकिन पुलिस और स्थानीय प्रशासन की लापरवाही के कारण यहां परेशानी बढ़ती जा रही है। जाम लगने पर पुलिस को अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। वाहन चालत की यातायात पुलिस की भूमिका निभाते हैं। वे अपना वाहन छोड़ कर समाजसेवा में जुट जाते हैं। दूसरी परेशानी यह भी है कि निर्माण के कारण धूल उड़ती रहती है। सिक्सलेन के निर्माण एजेंसी को छिडक़ाव करना चाहिए जो नहीं हो रहा है।

कलेक्टर से आग्रह किया था मीडिया ने
पिछले दिनों कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने पत्रकारों के साथ सौजन्य मीटिंग की। इस मीटिंग में शहर के कई मुद्दों पर चर्चा की। यह मुद्दा भी सामने आया कि इंदौर-उज्जैन मार्ग पर इन दिनों सिक्स लेन का काम चल रहा है। रोजाना जाम लग रहे हैं। कई डायवर्शन किए गए हैं। इसलिए इस मार्ग पर टोल टैक्स नहीं लगना चाहिए। कलेक्टर ने कहा, मैं इसे दिखवाता हूं।

यह नियम भी देख लीजिए
टोल टैक्स कुछ विशेष परिस्थितियों में नहीं लिया जा सकता, जैसे टोल प्लाजा पर वाहनों की कतार १०० मीटर से अधिक हो, या किसी वाहन चालक को टोल बूथ पर १० सेकंड से ज्यादा इंतजार करना पड़े तो टोल से मुक्ति मिल सकती है। इसके अलावा सरकान ने जीएनएसएस, ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम का उपयोग कर बीस किलोमीटर तक की यात्रा के लिए टैक्स से छूट देने की योजना बनाई है। पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। कहा गया कि जब निर्माण चल रहा है तो टैक्स किस बात का। फैसला आया कि जब सडक़ की हालत अच्छी नहीं है तो आप टोल टैक्स नहीं वसूल सकते।

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