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लद्दाख की 16077 फीट ऊंचाई पर उज्जैन के 17 वर्षीय अली मैमून ने दिखाया जज्बा, बगैर ऑक्सीजन सिलेंडर चढ़ाई कर रच दिया कीर्तिमान

अक्षरविश्व न्यूज|उज्जैन। लद्दाख का मौसम और भूगोल दोनों ही बेहद कठोर माने जाते हैं। दिन में तपिश और रात में कंपकंपा देने वाली ठंड। उस पर ऊंचाई पर खड़ी चढ़ाई, फिसलन और ऑक्सीजन की कमी। हर सेकंड जोखिम से भरा। ऐसी जगह पर बगैर ऑक्सीजन सिलेंडर के पहुंचना नामुमकिन होता है लेकिन उज्जैन के किशोर अली मैमून ने अपने हौसले से १६०७७ फीट की ऊंचाई हासिल कर ली। वह भी बगैर ऑक्सीजन सिलेंडर के।

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उज्जैन के सेंटपॉल स्कूल की कक्षा 11 वीं के विद्यार्थी अली मैमून ने 17 साल की उम्र में यह कारनामा कर दिखाया। एथलीट अली मैमून उद्योगपति मुर्तजाअली बड़वाहवाला के बेटे हैं और उन्हें ट्रैकिंग का शौक है। इसी महीने वह जम्मू-कश्मीर की वल्र्ड ऑफ वंडर के बैनर तले ट्रैकिंग के लिए लेह-लद्दाख गए थे। 20 सदस्यीय दल में वह सबसे युवा था।

इस दल का टारगेट था लद्दाख की सबसे ऊंची चोटी। 16077 फीट की इस ऊंचाई तक पहुंचने के लिए 5 दिन का टूर प्लान किया गया था। 56 किलोमीटर की चढ़ाई इसके लिए बैस कैंप से चढऩी थी। अली मैमून ने यह दूरी नाप दी और वह भी बगैर ऑक्सीजन सिलेंडर के। मैमून ने बताया कि यह ऊंचाई तय करने के बाद अब वह माउंट एवरेस्ट की ट्रैकिंग कर सकेंगे।

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क्या-क्या परेशानी आई

लेह-लद्दाख में दो ही परेशानी है, पहला भूगोल और दूसरा मौसम। यहां के पहाड़ सपाट और सीधी चढ़ाई वाले हैं। इनपर चढऩा आसान नहीं होता। सीधी चढ़ाई चढ़ते समय सावधानी रखनी होती है, क्योंकि एक भी गलत कदम हजारों फीट गहरी खाई में पटक सकता है। खड़ी चढ़ाई होने से थकान काफी होती है और ऊंचाई पर जाते समय ऑक्सीजन तेजी से कम होती है।

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ट्रैकर के पास बैग का वजन भी होता है। ऐसे में सांसों का संतुलन साधना पड़ता है। दूसरी परेशानी मौसम की रहती है। लद्दाख में दिन का तापमान अमूमन 10 डिग्री और रात का माइनस 3 से 5 डिग्री होता है। दोनों के बीच संतुलन बनाने में कठिनाई आती है।

अली का कहना है कि अगर आपके अंदर जुनून और हौसला है तो कोई भी ऊंचाई असंभव नहीं होती। उम्र से हम छोटे या बड़े नहीं होते, इरादे से बड़े होते हैं। अली का कहना है कि वह एथलीट हैं और 400 मीटर के धावक हैं, दौड़ की प्रैक्टिस ही उनके काम आई।

 यह भी उपलब्धि- हाल ही अली ने सीबीएसई की भोपाल में हुई एथलीट स्पर्धा में 400 मीटर में तीसरा स्थान हासिल किया है।

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