जीएसटी पोर्टल की तकनीकी खराबी से करदाता परेशान

उज्जैन। वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतिम और महत्वपूर्ण माह मार्च का जीएसटी आर थ्री-बी रिटर्न जमा करना करदाताओं और कर सलाहकारों के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। जीएसटी पोर्टल पर लगातार आ रही तकनीकी बाधाओं के कारण कामकाज पूरी तरह बाधित हो गया है। ऐसे हालात में टैक्स प्रैक्टिशनर्स रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि में बढ़ाने की मांग की है।

कर विशेषज्ञों का कहना है कि जीएसटी प्रणाली को लागू हुए लगभग आठ वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन विडंबना यह है कि आज भी हर महत्वपूर्ण तिथि पर पोर्टल का सर्वर जवाब दे जाता है। मार्च का रिटर्न पूरे वर्ष का अंतिम समायोजन होता है, जिसमें कर देयता का अंतिम निर्धारण कर सरकार को राजस्व का भुगतान किया जाता है। एक ओर विभाग रिटर्न के लिए दबाव बना रहा है, वहीं दूसरी ओर पोर्टल की विफलता ने कर सलाहकारों के हाथ बांध दिए हैं।
टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन के सचिव प्रसून भवालकर ने इस मुद्दे पर उज्जैन संभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर समस्या भी बताई है। उन्होंने बताया कि वर्तमान संकट करदाताओं की लापरवाही नहीं, बल्कि विभागीय पोर्टल की तकनीकी विफलता है। इससे पहले 11 अप्रैल को भी जीएसटीआर-वन की फाइलिंग के समय पोर्टल ने धोखा दिया था, जिसके कारण कर पेशेवरों को अवकाश के दिन भी जूझना पड़ा था। पोर्टल की सुस्ती के कारण ईमानदार करदाताओं में भारी चिंता है। यदि समय पर रिटर्न दाखिल नहीं हुआ, तो उन पर भारी विलंब शुल्क और ब्याज का बोझ बढ़ेगा। साथ ही, इनपुट टैक्स क्रेडिट और कार्यशील पूंजी पर भी इसका बुरा असर पड़ेगा।
प्रमुख समस्याएं : न चालान बन रहे, न डेटा सेव हो रहा
चालान जनरेशन- कर भुगतान के लिए चालान जनरेट नहीं हो पा रहे हैं।
लॉग इन एरर- पोर्टल बार-बार रुक रहा है और लॉग-इन तथा सबमिशन के दौरान तकनीकी त्रुटियां आ रही हैं।
डेटा मिलान- रिटर्न सेव और फाइल करने में घंटों का समय लग रहा है, जिससे डेटा मिलान का कार्य प्रभावित हो रहा है।









