पढ़ाई नहीं, धर्म जरूरी, कहा स्कूल से बच्चों को निकाले

उज्जैन के मुफ्ती का वंदे मातरम् की अनिवार्यता पर बयान
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
बोले- धार्मिक आजादी पर हमला, फैसला वापस हो
उज्जैन। केंद्र सरकार के सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् को अनिवार्य करने के फैसला का विरोध शुरू हो गया है। उज्जैन के मुफ्ती नासिर अली नदवी ने मुसलमानों से अपील की है कि अगर स्कूलों में वंदे मातरम् होता है तो मुस्लिम समाजजन वहां से अपने बच्चों को निकाल लें, क्योंकि यह इस्लाम विरोधी है।
नदवी ने कह यह आदेश हमारी धार्मिक आजादी पर हमला है। वंदे मातरम् में कहा गया है कि हिंदुस्तान की भूमि की हम पूजा करते हैं, लेकिन मुसलमान के लिए यह बिल्कुल भी सही नहीं है कि वह अल्लाह के साथ किसी और को अपनी पूजा में शामिल करे। हम कहेंगे कि जिन स्कूलों में वंदे मातरम् को अनिवार्य किया जा रहा है, वहां से सभी मुसलमान अपने बच्चों को निकाल लें।
हम इसकी इजाजत नहीं दे सकते कि वह इस्लाम में रहकर किसी और खुदा की इबादत करे। नदवी ने कहा कि जो लोग इस्लामी शिक्षा को छोड़कर अन्य शिक्षा हासिल करते हैं, वह भी ठीक नहीं है। धर्म से सबसे ऊपर है। सरकार का फैसला अल्पसंख्यक वर्ग की आजादी पर हमला है। नदवी ने कहा कि वह लोगों को सिर्फ मशविरा दे सकते हैं। इसका पालन करना ना करना उनके हाथ में हैं। फिर भी इस्लाम मानने वालों को उन स्कूलों में अपने बच्चों को नहीं पढ़ाना चाहिए, जहां वंदे मातरम् अनिवार्य हो।









