महाभारत के चक्रव्यूह और अस्त्र-शस्त्र से साक्षात्कार

इतिहास और शौर्य की जीवंत गैलरी में अस्त्र-शस्त्र रोमांचित
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उज्जैन। विक्रम उत्सव 2026 के अंतर्गत शहर में आयोजित भव्य प्रदर्शनियां इन दिनों जिज्ञासा और ज्ञान का केंद्र बनी हुई हैं। सोमवार को महर्षि पाणिनी संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय सहित विभिन्न शिक्षण संस्थानों के सैकड़ों विद्यार्थी इन प्रदर्शनियों को देखने पहुंचे। यहाँ भारत की प्राचीन धार्मिक, सांस्कृतिक और युद्ध कौशल की समृद्ध परंपरा को जिस सजीवता के साथ उकेरा गया है।
प्रदर्शनी का सबसे आकर्षक हिस्सा महाभारत खंड है। यहाँ केवल चित्रों के माध्यम से ही नहीं, बल्कि उस काल के प्रमुख योद्धाओं द्वारा उपयोग किए जाने वाले अस्त्र-शस्त्रों की प्रतिकृतियों को प्रदर्शित किया गया है। प्रत्येक अस्त्र के साथ उससे संबंधित योद्धा का नाम, शस्त्र की मारक क्षमता और उसका पौराणिक इतिहास अंकित किया गया है।
महाकाल काल के सबसे चर्चित युद्धकला चक्रव्यूह की जटिल संरचना, महाभारत कालीन विविध पताकाएं (ध्वज) और शंखों के प्रकारों को देखकर दर्शक युद्ध विज्ञान की प्राचीन तकनीक से रूबरू हो रहे हैं। महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ और संस्कृति विभाग द्वारा दो स्थानों पर प्रदर्शनी लगाई गई है। विक्रमादित्य शोध पीठ (देवास रोड) पर विक्रमादित्य काल के दुर्लभ पुरातात्विक अवशेषों, प्राचीन सिक्कों और महाभारत कालीन विषयों पर विशेष फोकस किया गया है। जबकि कालिदास अकादमी परिसर में आर्य भारत की सांस्कृतिक झलक, 84 महादेव, जनजातीय देवलोक और श्रीकृष्ण प्रभात जैसे विषयों पर कलात्मक गैलरी सजाई गई है।
प्रदर्शनी बारे में जरूरी जानकारी
प्रदर्शनी 15 फरवरी से शुरू हुई है और 19 मार्च तक रहेगी।
आम नागरिक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक नि:शुल्क अवलोकन कर सकते हैं।
रागमाला, विक्रमादित्य और अयोध्या, जनजातीय संस्कृति एवं प्राचीन सैन्य विज्ञान प्रमुख विषय हैं।










