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हनुमान जयंती विशेष…अनूठा मंदिर… चलित मुद्रा में दाढ़ी-मूंछ वाले श्रीराम और नंदी की तरह गर्भगृह के बाहर विराजे हनुमानजी

विशाल जूनवाल/चंद्रशेखर कहार उज्जैन। आज श्री हनुमान जयंती है। भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में भगवान श्रीराम और उनके परम भक्त हनुमानजी का ऐसा मंदिर जो अपने आप में अनूठा है। देश का अकेला ऐसा मंदिर हैं जहां भगवान श्रीराम और लक्ष्मण दाढ़ी मूंछ और चलित मुद्रा में विराजित हैं, जबकि उनके अनन्य भक्त हनुमान जी उनके चरणों के पास नहीं बल्कि मंदिर के गर्भगृह के बाहर हाथ जोड़े विराजमान हैं, ठीक उसी तरह जिस तरह भगवान शिव के सामने नंदी महाराज विराजमान रहते हैं।

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अंकपात क्षेत्र में विष्णु सागर के समीप स्थित श्रीराम जर्नादन मंदिर 17वीं सदी का हैं बताया जाता है कि इसका निर्माण राजा जयसिंह ने करवाया था। विशाल परकोटे से घिरा मंदिरों का समूह है। यहां भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता की मूर्तियां वनवासी वेशभूषा में हैं। मंदिर अपनी प्राचीन वास्तुकला के लिए भी प्रसिद्ध है जिसके गर्भगृह में मालवा-मराठा शैली के भित्ति चित्र भी हैं जिसमें भगवान राम की बाल लीलाएं एवं विवाह के दृश्य हैं। इन्हें बनाने में कई रंगों का उपयोग किया गया है। यह ऐतिहासिक एवं अतिप्राचीन मंदिर पुरातत्व संरक्षित स्मारकों में से एक हैं।

चित्र के साथ प्रभु श्रीराम की कुंडली: यहां नागर शैली में निर्मित पूर्व मुखी दो मंदिर हैं, पहला मंदिर भगवान विष्णु का है और दूसरा प्रभु श्रीराम का। राम मंदिर का गर्भगृह मालवा-मराठा शैली के अद्भुत चित्रों से चित्रित है जो भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव, विवाह समारोह पर आधारित हैं। इन दीवारों पर श्रीराम की कुंडली भी दिखाई देती है। श्रीराम की कथा संबंधी चित्र हैं जो दोनों दीवारों पर देखे जा सकते हैं। दक्षिण की दीवार के मध्य भाग में वृत्ताकार देवकुलीका में गणपति का चित्र है। देवकुलीका के ऊपर भित्ति संयोजन का नाम देवनागरी में अंकित है। यह रामनवमी पूजा समय का है।

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हाथ जोड़कर विराजे पवन पुत्र
भगवान श्रीराम के अनन्य और सबसे बड़े भक्त हनुमानजी हमेशा उनके साथ ही रहते हैं। मंदिरों में भी हमने भगवान श्रीराम के समीप ही उन्हें देखा है लेकिन इस मंदिर में हनुमान जी गर्भगृह के बाहर विराजित हैं। हाथ जोड़ेकर प्रणाम करती मुद्रा में यह मूर्ति अपने आप में अनूठी और संभवत: पहली है। भगवान के दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।

पुलिस के ‘महावीर’… पहले नमन, फिर करते हैं ड्यूटी

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भ गवान महाकाल की नगरी में हनुमानजी के कई मंदिर हैं जो अपने आप में अनोखे और श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं लेकिन कुछ मंदिर ऐसे भी हैं जो विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। इन मंदिरों की महिमा इतनी है कि हर मंगलवार एवं शनिवार को दूर-दूर से श्रद्धालु बाबा के दर्शनों के लिए आकर अपनी मनोकामना मांगते हैं। उज्जैन की इसी पावन धरा पर पुलिस के ‘महावीर’ भी हैं, पढ़कर आपको आश्चर्य हुआ होगा लेकिन श्री हनुमान जन्मोत्सव के मौके पर आज हम उन मंदिरों का भी उल्लेख कर रहे हैं जहां कानून की रक्षा करने और अपराधियों को उनके अपराध की सजा दिलवाने वाले खाकी वर्दीवाले भी सिर झुकाते हैं। शहर के अधिकांश थाने में बाबा हनुमान के मंदिर हैं। यहां अधिकारी हो या जवान जब भी ड्यूटी पर आते हैं, पहले बाबा को नमन करते हैं जिसके बाद अपने काम में जुट जाते हैं।

1915 में फौजियों ने की थी स्थापना तब से यहां विराजे फौजी हनुमान

यूं तो आपने हनुमान जी के चमत्कार के कई हिस्से सुने और देखे होंगे। इसके अलावा कई अनोखे मंदिर भी देख होंगे लेकिन उज्जैन में ही हनुमानजी का एक और अनोखा मंदिर है जिसे फौजी हनुमान के नाम से जाना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस मंदिर की स्थापना भारतीय फौजियों ने की थी। मंदिर के पुजारी ज्ञानसिंह गौतम ने बताया कि आजादी के पहले वर्ष 1915 में जब यह कैंट इलाका होता था।

तब राजपूताना रेजिमेंट की 56 इन्फ्रेंट्री ने मंदिर की स्थापना की थी। यहां पहले अखाड़ा और घुड़साल भी होता था जहां घोड़े बांधे जाते थे। ज्ञानसिंह ने बताया कि उनके दादा शिवपाल सिंह गौतम 1930 में रेजिमेंट में भर्ती हुए थे और उसके बाद से ही पूजा करते थे। आज हम उनकी पांचवीं पीढ़ी के तौर पर मंदिर का पूजन करते हैं। हनुमान जन्मोत्सव पर गुरुवार को सुबह से अखंड रामायण पाठ की शुरुआत हुई। इसके बाद भगवान का बाल रूप में शृंगार कर महाआरती कर प्रसाद वितरित किया गया जो दिनभर चलता रहेगा।

उदयवीर हनुमान, होमगार्ड लाइन

नागझिरी स्थित होमगार्ड लाइन बाल उदयवीर हनुमान मंदिर पर अखंड रामायण पाठ के साथ भंडारे का आयोजन बाल उदयवीर हनुमान मंदिर समिति द्वारा किया जा रहा है। समिति सदस्यों ने बताया कि मंदिर में कई सालों से अखंड रामायण पाठ एवं भंडारा हो रहा है। गुरुवार को भी करीब 10 हजार श्रद्धालुओं के लिए भंडारे होगा जिसकी शुरुआत शाम 5 बजे से होगी जो श्रद्धालुओं के आगमन तक जारी रहेगा।

सूर्यमुखी हनुमान, देवासगेट थाना

देवासगेट थाना परिसर के समीप स्थित मंदिर में बाबा का बर्फीले पहाड़ों के ऊपर से संजीवनी बूटी ले जाते हुए शृंगार किया गया है। पुजारी पं. अविनाश वैद्य ने बताया सुबह 7 बजे आरती की गई और 10 बजे से हवन की शुरुआत हुई। दोपहर 12 बजे जन्म आरती की गई। 1 बजे से मंदिर के सामने ही भंडारे की शुरुआत हुई।

वीर हनुमान, नानाखेड़ा थाना

नानाखेड़ा थाना स्थित वीर हनुमान मंदिर में श्री हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर बाबा का आकर्षक शृंगार कर महाआरती की गई। मंदिर को भी आकर्षक तरीके से सजाया गया। श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।

रक्षित हनुमान, माधवनगर थाना

माधवनगर थाना स्थित रक्षित हनुमान मंदिर में गुरुवार को भगवान का आकर्षक शृंगार कर महाआरती की गई। मंदिर को भी आकर्षक तरीके से सजाया गया। श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।

रुद्रेश्वर हनुमान, चिमनगंज थाना

थाना परिसर स्थित मंदिर में भगवान रुद्रेश्वर हनुमान का आकर्षक शृंगार कर पूजन किया। इसके बाद महाआरती कर प्रसाद वितरित किया गया।

इन मंदिरों की भी अद्भुत महिमा

श्री मायापति हनुमान मंदिर

आगर रोड पर सामाजिक न्याय परिसर स्थित श्री मायापति हनुमान मंदिर में छह दिवसीय हनुमान जन्मोत्सव आयोजित किया जा रहा है। इसके तहत बुधवार रातभर ब्रह्मांड की थीम पर बाबा का आकर्षक शृंगार किया गया। गुरुवार को भक्तों को भगवान जगन्नाथ धाम के दर्शन हुए जिसे देख हर कोई भावविभोर हो गया। कार्यक्रमों की कड़ी में सुबह 6 बजे जन्म आरती की गई एवं 9 बजे से हवन किया गया। शाम 7 बजे महाआरती कर भंडारे की शुरुआत होगी। इस दौरान श्रीनाथ चौधरी एवं मंडली द्वारा भजनों की प्रस्तुति दी जाएगी।

श्री गेबी साहब हनुमान मंदिर

ढाबा रोड स्थित श्री गेबी साहब हनुमान मंदिर की महिमा अपरंपरा है। यह भक्तों की अटूट आस्था का केंद्र है। इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां बाबा हनुमान की विशाल प्रतिमा है जिसका शृंगार सिंदूर से नहीं बल्कि हिंगलू से किया जाता है। कहा जाता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से यहां आता है, वह कभी निराश होकर नहीं लौटता। हनुमान जयंती पर गुरुवार को मंदिर को अलग-अलग फूलों और रोशनी से सजाया गया। बाबा का अद्भुत शृंगार कर तरह-तरह के पकवानों का भोग लगाकर महाआरती की गई।

श्री खड़े हनुमान मंदिर

सतीगेट स्थित श्री खड़े हनुमान का मंदिर अपनी अनोखी पहचान के लिए प्रसिद्ध है। यहां हनुमान जी की खड़े हुई विशाल प्रतिमा है जिसमें बाबा दोनों हाथ जोड़े हुए हैं। यही कारण है कि इस मंदिर को अनूठे मंदिर में गिना जाता है। मान्यता है कि यहां बच्चों को बुरी नजर से बचाने के लिए काले डोरे में तावीज बांधा जाता है। इसी कारण यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। गुरुवार को बाबा का विशेष शृंगार कर पूजन एवं आरती की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं को नुक्ती का प्रसाद वितरित किया गया जो दिनभर बांटा जाएगा।

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