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ह्यूमन ट्रैफिकिंग की शंका में रात 1 बजे ट्रेन से 50 से अधिक को उतारा

सभी बिहार के और अलग-अलग मकसद से जा रहे थे गुजरात, सुबह तक जारी थी जांच

 

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। रेलवे स्टेशन पर गुरुवार रात बच्चों की तस्करी की सूचना पर प्रशासन ने एक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। अंत्योदय एक्सप्रेस को उज्जैन और फिर नागदा स्टेशन पर रुकवाकर पुलिस, बाल कल्याण समिति और अन्य विभागों की संयुक्त टीम ने करीब 20 से अधिक नाबालिग को उनके साथियों (कुल 50 से अधिक) को उतारा है। ये सभी लोग बिहार के हैं और अलग-अलग मकसद से गुजरात जा रहे थे।

बाल कल्याण समिति को सूचना मिली थी कि बिहार के मुजफ्फरनगर से करीब 100 बच्चों को मजदूरी के लिए गुजरात ले जाया जा रहा है। इस इनपुट पर सिटी पुलिस बल के साथ आरपीएफ, जीआरपी, श्रम विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग ने कार्रवाई शुरू की। गुरुवार रात करीब 11 बजे ट्रेन के उज्जैन पहुँचते ही तलाशी शुरू हुई। आधे घंटे की पूछताछ में 4 बच्चों को रेस्क्यू किया गया, इसी दौरान ट्रेन स्टेशन से रवाना हो गई। इसी बीच किसी बड़े मामले की आशंका होने पर सीएसपी दीपिका शिंदे के निर्देश पर नागदा स्टेशन पर ट्रेन को फिर से रुकवाया गया। यहाँ एक घंटे चले सघन तलाशी अभियान के बाद 2० और बच्चों को नीचे उतारा गया। ये लोग जिनके साथ यात्रा कर रहे थे उन्हें उतारा गया। कुल ५० से अधिक लोगों को टीम ने ट्रेन से उतारा और उज्जैन जीआरपी लाकर पूछताछ की कार्रवाई शुरू की।

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सभी ने अलग-अलग मकसद बताया

सहायक श्रम आयुक्त राखी जोशी ने बताया कि सूचना मिली थी कि काम कराने के लिए 100 से अधिक बच्चों को बिहार से गुजरात ले जाया जा रहा है। कार्रवाई की तो इतने लोग नहीं मिले। करीब 20 से अधिक बच्चे जरूर अपने नजदीकी रिश्तेदारों (जैसे चाचा, मामा, बुआ आदि) के साथ गुजरात की ओर यात्रा करते मिले, जिन्हें उनके रिश्तेदारों सहित पुलिस ने ट्रेन से उतारा है। पूछताछ के दौरान सभी ने घूमने के लिए गुजरात के अलग-अलग शहरों की ओर जाने की बात कही है। नाबालिगों को बाल कल्याण समिति की सुरक्षा में रखा गया है। सहायक श्रमायुक्त ने बताया कि हालांकि कोई भी बच्चा काम के लिये ले जाने की बात नहीं कर रहा है। रेस्क्यू किए गए बच्चों में से दो की उम्र 14 साल से भी कम है।

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प्रारंभिक सूचना के अनुसार, बच्चों को मजदूरी के लिए गुजरात ले जाने का शक है। पूछताछ के दौरान कुछ बच्चों ने सोमनाथ घूमने जाने की बात भी कही है। जीआरपी टीआई अमित भावसार का कहना है कि सभी बच्चों के माता-पिता को फोन लगाकर वेरीफिकेशन किया जा रहा है। जीआरपी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन बच्चों को साथ ले जाने वाले लोग कौन थे और उनका वास्तविक उद्देश्य क्या था। स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही बच्चों को यहां से मुक्त किया जाएगा। सुबह 11 बजे तक पुलिस की जांच जारी थी।

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मामले का दूसरा पहला पहलू अत्यंत मार्मिक है। जीआरपी की सुरक्षा में मौजूद नाबालिगों के साथ यात्रा करने वाले युवा काम के सिलसिले में अहमदाबाद और राजकोट जा रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि उनके क्षेत्रों में काम-धंधे नहीं है। इस कारण होश संभालते ही वे काम की तलाश मेें गुजरात पहुंच जाते हैं। कुछ युवाओं ने तो हाल ही मेें 18 की उम्र पूरी की है। बिहार जाने वाले शहंशाह, रणजीत कुमार ने बताया कि इस कार्रवाई में कई का बेग, मोबाइल चार्जर ट्रेन में ही रह गया। साथ जाने वाले लडक़े उनके रिश्तेदार ही हैं और घरवालों की सहमति से ही उनके साथ घूमने गुजरात जा रहे थे।

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