जीव हत्या से बचें, मांसाहार- व्यभिचार नहीं करें-उमाकांत महाराज

तीन दिवसीय बाबा जय गुरुदेव आश्रम में उमड़े देश-दुनिया से भक्त, गुलाबी रंग में डूबा दिख रहा परिसर
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। जीव हत्या से हमें बचना चाहिए। मांसाहार और व्यभिचार नहीं करना चाहिए। सत्संग हमें यह सिखाता है कि क्या खाना चाहिए? क्या पहनना चाहिए? कैसे रहना चाहिए? यह बात पिंगलेश्वर स्थित बाबा जयगुरुदेव आश्रम में उमाकांत महाराज ने कही। वह तीन दिवसीय सालाना जीवन रक्षक भंडारे में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। महाराज ने कहा कि सत्संग हमें भाई-भाई और पिता पुत्र के बीच बर्ताव करना सिखाता है। पति-पत्नी का फर्ज बताता है।
दया सबसे बड़ा धर्म है। दया यह है कि अगर कोई गलती भी करे तो उसको माफ कर दिया जाए। किसी भी जीव को मत सताओ। दीनता छोटा बन जाने को कहते हैं। कोई अगर गुस्से में है और उसके पैर पकड़ लो तो वह कितना भी नाराज हो, वह झुक कर आपको उठाएगा। जिनमें महानता यानी बड़प्पन होता हैं वे माफ कर देते हैं क्योंकि छोटे उत्पात करते हैं और बड़े उन्हें क्षमा करते हैं।
संयम-नियम से रहें
स्वस्थ्य बच्चा जन्म में नौ महीने का समय लेता है और इस समय से पहले पैदा होने वाला कमजोर रहता है, विकृत रहता है। इसलिए संयम-नियम से रहिए। कुछ ना कुछ पूजा-पाठ, साधना करते रहिए, ताकि बच्चे संस्कारी और नेक बन सकें। लोग कर्म से अलग हो गए। शरीर को पूजा-उपासना, साधना के बजाय भोग में लगा दिया। कर्म खराब कर लिए, धर्म बेच दिया तो यह यह शरीर भी पापी हो गया। पाप की सजा तो मिलती ही है। जीव हत्या करना, मांस मछली खाना, दूसरी औरत, दूसरे पुरुष के साथ बुरा कर्म करना, ये गलत कर्म हंै, इनकी वजह से नरक में जाना ही पड़ता है।
भीड़ इतनी कि… गुलाबी रंग में डूबा है आश्रम
तीन दिनी सत्संग में शामिल होने के लिए देश-दुनिया से लोग आ रहे हैं। गुलाबी टोपी और दुपट्टा धारण करने वाले इन लोगों के कारण आश्रम गुलाबी रंग में डूबा है। भयानक गर्मी के बावजूद यहां पहुंचे भक्तों का एक ही लक्ष्य है गुरु दर्शन,सत्संग और दया।









