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कौन था रियल सूरमा भोपाली? जानिए शोले के मशहूर किरदार का राज

भोपाल के नाहर सिंह बघेल से प्रेरित था शोले का मशहूर किरदार, जावेद अख्तर ने भी किया था स्वीकार

“मियां, नाम तो सुना ही होगा हमारा… सूरमा भोपाली!”
शोले का यह मशहूर संवाद सुनते ही अभिनेता जगदीप का चेहरा और उनका अनोखा अंदाज याद आ जाता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि फिल्म का यह यादगार किरदार किसी लेखक की कल्पना नहीं, बल्कि भोपाल के एक वास्तविक शख्स से प्रेरित था।

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उस शख्स का नाम था नाहर सिंह बघेल, जिन्हें भोपाल में लोग प्यार से ‘नाहर मामा’ और ‘काले मामा’ कहकर बुलाते थे। 1960 के दशक के भोपाल में उनकी अलग पहचान थी। वे भोपाल म्युनिसिपलिटी में नाकेदार थे और शहर के हर वर्ग के लोगों से उनकी गहरी दोस्ती थी। उनकी बेबाकी, गुस्सैल स्वभाव और दोस्तों के लिए हमेशा खड़े रहने की आदत ने उन्हें शहर में खास बना दिया था।

कहा जाता है कि जब भी नाहर मामा किसी विवाद में कूद पड़ते, उनके दोस्त मजाक में कहते थे, “बड़े सूरमा बने फिरते हो!” धीरे-धीरे यही तंज उनकी पहचान बन गया और पूरा शहर उन्हें ‘सूरमा भोपाली’ के नाम से जानने लगा।

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जावेद अख्तर की दोस्ती और शोले का किरदार

नाहर सिंह बघेल की दोस्ती मशहूर गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर से कॉलेज के दिनों से थी। 1975 में जब फिल्म शोले रिलीज हुई और उसमें सूरमा भोपाली का किरदार सामने आया, तो नाहर सिंह को लगा कि यह चरित्र काफी हद तक उनके व्यक्तित्व से मिलता-जुलता है।

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बताया जाता है कि इस बात को लेकर उन्होंने जावेद अख्तर के खिलाफ कानूनी लड़ाई भी शुरू की थी। हालांकि बाद में मामला शांत हो गया और मुकदमा वापस ले लिया गया। वर्षों बाद 2017 में भोपाल के एक कार्यक्रम में जावेद अख्तर ने स्वीकार किया कि सूरमा भोपाली का किरदार उनके कॉलेज के दिनों के एक मित्र से प्रेरित था।

गायक भी थे नाहर मामा

कम लोग जानते हैं कि नाहर सिंह बघेल एक अच्छे गायक भी थे। वे आकाशवाणी में कैजुअल आर्टिस्ट के रूप में काम कर चुके थे। संगीत, महफिलें और दोस्ती उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा थीं और उनकी मौजूदगी किसी भी बैठक की रौनक बढ़ा देती थी।

हादसे में हुई मौत, लेकिन अमर हो गया नाम

19 नवंबर 1979 को एक सड़क दुर्घटना में नाहर सिंह बघेल का निधन हो गया। लेकिन उनकी शख्सियत आज भी लोगों की यादों में जिंदा है। जब भी टीवी पर जगदीप की आवाज में “हमारा नाम भी सूरमा भोपाली ऐसेई नईं है…” गूंजता है, तो भोपाल की गलियों में मशहूर रहे नाहर मामा की याद ताजा हो जाती है।

यही वजह है कि नाहर सिंह बघेल सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के सबसे यादगार किरदारों में से एक की असली प्रेरणा के रूप में हमेशा याद किए जाते रहेंगे।

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