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Supergirl Review: विजुअल्स शानदार, कहानी ने कर दिया निराश

हॉलीवुड के मशहूर DC कॉमिक्स यूनिवर्स की नई फिल्म ‘सुपरगर्ल’ बड़े ही गुपचुप तरीके से सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। मेकर्स ने भारत में इसका कोई खास प्रमोशन नहीं किया, जिसके चलते कई लोगों को तो इसके रिलीज होने की खबर तक नहीं है, जबकि यह फिल्म हिंदी में भी रिलीज की गई है। आइए बिना किसी सस्पेंस के सीधे बात करते हैं कि यह फिल्म देखने लायक है या नहीं।

 

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क्या है फिल्म की कहानी?

यह कहानी सुपरमैन की कजिन कारा (मिली अल्कॉक) की है, जो पृथ्वी से दूर एक अलग प्लैनेट पर रहती है। वहां ‘रेड सन’ (लाल सूरज) है, जो कारा की ऊर्जा का मुख्य स्रोत है, इसलिए वह वहां बिल्कुल सामान्य जिंदगी जीती है। कारा के साथ उसका एक वफादार पालतू कुत्ता ‘क्रिप्टो’ भी रहता है।

  • मुख्य मोड़: कहानी में मोड़ तब आता है जब क्रिप्टो की जान खतरे में पड़ जाती है।

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  • बड़ा संघर्ष: अपने पेट डॉग क्रिप्टो को बचाने के लिए कारा को ‘येलो हिल्स’ के खतरनाक ब्रिगैंड गिरोह के सरगना क्रेम (मैथियास शोनार्ट्स) से लोहा लेना पड़ता है।

  • मददगार साथी: इस मुश्किल लड़ाई में कारा को रूथी मैरी (ईव रिडले) और लोबो (जेसन मोमोआ) का साथ मिलता है।

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कैसा है कलाकारों का अभिनय?

  • मिली अल्कॉक (सुपरगर्ल/कारा): उन्होंने अपने किरदार के साथ पूरा न्याय करने की कोशिश की है। वे स्क्रीन पर सुपरगर्ल के रूप में जचती हैं, लेकिन उन्हें एक दमदार स्क्रिप्ट की कमी साफ खलती है।

  • मैथियास शोनार्ट्स (विलेन क्रेम): विलेन के रूप में वे उतने खौफनाक या डरावने नहीं लगे, हालांकि उनका काम ठीक-ठाक है।

  • ईव रिडले (रूथी मैरी): इन्होंने सुपरगर्ल का साथ बखूबी निभाया है और उनका काम काफी अच्छा है।

  • जेसन मोमोआ (लोबो): फिल्म में उनका एक ‘एक्सटेंडेड कैमियो’ (विशेष भूमिका) है, जो थिएटर्स में माहौल बनाने का काम करता है।

  • डेविड कोरेनस्वेट (सुपरमैन): कुछ सीन्स के लिए इन्हें दोबारा सुपरमैन के रूप में देखना फैंस के लिए एक बेहतरीन सरप्राइज है।

निर्देशन और तकनीकी पक्ष में कहां रह गई कमी?

निर्देशक क्रेग गिलेस्पी इस फिल्म में पूरी तरह से कन्फ्यूज नजर आए। वे तय ही नहीं कर पाए कि उन्हें फिल्म में एक्शन पर ज्यादा फोकस करना है, इमोशंस पर या फिर इसकी कहानी पर।

फिल्म में कारा की बैकस्टोरी (अतीत) को उसी तरह दिखाने की कोशिश की गई है जैसे सुपरमैन की दिखाई जाती है, लेकिन खराब प्रेजेंटेशन के कारण दर्शक उससे भावनात्मक रूप से जुड़ ही नहीं पाते। इसके अलावा, DC जैसे बड़े बैनर का नाम जुड़े होने के बावजूद, फिल्म के कुछ सीन्स में विजुअल इफेक्ट्स (VFX) काफी कमजोर और नकली लगते हैं। फिल्म की पूरी कहानी पृथ्वी के बाहर की लिखी गई है, जो एक समय के बाद दर्शकों को बोर करने लगती है।

फिल्म के पॉजिटिव पॉइंट्स (खूबियां)

  • सुपरमैन और लोबो के कैमियो रोल्स फिल्म की सबसे बड़ी जान हैं। जितनी देर भी ये स्क्रीन पर आते हैं, आप फिल्म को एंजॉय करते हैं।

  • सुपरगर्ल का पेट डॉग ‘क्रिप्टो’ भी स्क्रीन पर आपका थोड़ा-बहुत मनोरंजन करने में कामयाब रहता है।

फिल्म के नेगेटिव पॉइंट्स (खामियां)

  • फिल्म की रफ्तार बहुत सुस्त है, पूरी फिल्म बस चलती रहती है और आप उसे बिना किसी रोमांच के देखते रहते हैं।

  • विलेन के इरादे बिल्कुल साफ नहीं हैं कि वह आखिर क्यों और किसलिए मार-काट मचा रहा है।

  • एक आम DC फैन की उम्मीदों पर यह फिल्म खरी नहीं उतरती, थिएटर से निकलने के बाद इसमें कुछ भी ऐसा नहीं बचता जो आपको याद रहे।

फाइनल वर्डिक्ट: देखें या नहीं?

अगर आप DC यूनिवर्स के बहुत बड़े फैन हैं, तो इस फिल्म को एक बार थिएटर में देख सकते हैं ताकि आगे आने वाली फिल्मों की कोई कड़ी आपसे मिस न हो। लेकिन अगर आप एक बेहतरीन, रोमांचक और यादगार सुपरहीरो फिल्म की उम्मीद लेकर जा रहे हैं, तो यह फिल्म आपको निराश कर सकती है।

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