Amarnath Yatra 2026: तेजी से पिघल रहे बाबा बर्फानी

Amarnath Yatra 2026: तेजी से पिघल रहा बाबा बर्फानी, अब सिर्फ 1 फीट का बचा हिमलिंग
Amarnath Yatra 2026: अमरनाथ यात्रा 2026 के बीच श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। पवित्र बाबा बर्फानी का हिमलिंग तेजी से पिघल रहा है और ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार अब इसका आकार करीब 1 फीट रह गया है। हालांकि हिमलिंग के आकार में कमी आने के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई है और बड़ी संख्या में भक्त लगातार दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

चार दिन में 85 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
3 जुलाई से शुरू हुई Amarnath Yatra 2026 में अब तक 85,779 से अधिक श्रद्धालु पवित्र गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। सोमवार को अकेले 28,818 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। प्रशासन के अनुसार यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
7 फीट से घटकर 1 फीट रह गया हिमलिंग
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक—
- 23 मई: हिमलिंग की ऊंचाई लगभग 7 फीट थी।
- 29 जून: यह घटकर करीब 5 फीट रह गई।
- 7 जुलाई: ताजा तस्वीरों के अनुसार हिमलिंग का आकार करीब 1 फीट रह गया है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि मौसम ऐसा ही रहा तो हिमलिंग कुछ ही दिनों में पूरी तरह पिघल सकता है।
क्यों तेजी से पिघल रहा है बाबा बर्फानी?
विशेषज्ञों के अनुसार हिमलिंग के तेजी से पिघलने के पीछे कई कारण हो सकते हैं—
- बढ़ता तापमान
- ग्लोबल वार्मिंग
- यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी
- प्राकृतिक जलवायु परिवर्तन
हालांकि इस विषय पर अलग-अलग विशेषज्ञों की राय भी सामने आती रही है।
पहले भी बन चुके हैं ऐसे हालात
यह पहली बार नहीं है जब अमरनाथ हिमलिंग समय से पहले पिघला हो।
- 2016 में यात्रा शुरू होने के करीब 10 दिन बाद ही हिमलिंग लगभग समाप्त हो गया था।
- 2013 में भी यात्रा समाप्त होने से पहले हिमलिंग पूरी तरह पिघल गया था।
अमरनाथ यात्रा का धार्मिक महत्व
हिंदू मान्यताओं के अनुसार अमरनाथ गुफा वही स्थान है जहां भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था। इसी कारण अमरनाथ यात्रा को देश की सबसे पवित्र तीर्थयात्राओं में से एक माना जाता है।
इस वर्ष यात्रा 3 जुलाई से शुरू हुई है और रक्षाबंधन (28 अगस्त) तक चलेगी।
अमरनाथ यात्रा के दो प्रमुख मार्ग
श्रद्धालु दो रास्तों से यात्रा कर सकते हैं—
- पहलगाम मार्ग – लंबा लेकिन अपेक्षाकृत आसान।
- बालटाल मार्ग – छोटा लेकिन अधिक कठिन, हालांकि वापसी के लिए अधिक सुविधाजनक माना जाता है।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम
यात्रियों की सुविधा के लिए प्रशासन ने दोनों मार्गों पर व्यापक व्यवस्था की है।
- जगह-जगह लंगर
- हजारों टेंट
- चिकित्सा सुविधाएं
- सुरक्षा व्यवस्था
- रुकने और भोजन की पर्याप्त व्यवस्था
इन सुविधाओं के कारण खराब मौसम के बावजूद श्रद्धालु सुरक्षित रूप से यात्रा पूरी कर रहे हैं।









