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अगले 17 दिन में शादियों के 6 मुहूर्त

इसके बाद नवंबर में देवउठनी एकादशी से फिर शुरू होंगे मांगलिक कार्य

 

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अक्षरविश्व न्यूज|उज्जैन। मांगलिक कार्यों के लिहाज से अगले 17 दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इस दौरान इस सीजन के शादी के शेष 6 मुहुर्त हैं। इसके बाद शादियों का सीजन पूरी तरह थमने जा रहा है। ज्योतिषियों के अनुसार 12 जुलाई इस सीजन का आखिरी बड़ा मुहूर्त है। इसके ठीक बाद 24 जुलाई को देवशयनी एकादशी आते ही चातुर्मास शुरू हो जाएगा और अगले चार महीनों के लिए मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा।

पंचांगकर्ता पं. विजय शर्मा ने बताया कि इस सीजन में मांगलिक कार्यों के लिए केवल छह शुभ तिथियां ही शेष बची हैं। ये सभी मुहूर्त जुलाई महीने की 2, 3, 4, 9, 11 और 12 तारीख को पड़ रहे हैं। इन तारीखों के निकलते ही आषाढ़ शुक्ल एकादशी यानी 24 जुलाई से प्रतिबंध लागू हो जाएगा, जो कार्तिक शुक्ल एकादशी से एक दिन पहले तक जारी रहेगा। इन चार महीनों की अवधि में किसी भी प्रकार के नए या शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। इस दौरान केवल ईश्वर की भक्ति, जप, तप, व्रत, दान, सत्संग और कथा-श्रवण को ही विशेष महत्व दिया गया है।

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खगोलीय गणना और सूर्य देव का दक्षिणायन होना: ज्योतिषीय और खगोलीय गणित के अनुसार चातुर्मास के दौरान सूर्य देव की चाल में एक बड़ा परिवर्तन देखने को मिलता है। इस समय सूर्य देव कर्क राशि में प्रवेश करते हैं और दक्षिणायन की ओर बढ़ जाते हैं। शास्त्रों में दक्षिणायन की इस समयावधि को देवताओं की रात्रि माना गया है। किसी भी विवाह, मुंडन या गृह प्रवेश जैसे बड़े संस्कार को सफलतापूर्वक संपन्न करने के लिए सौरमंडल में शुभ ग्रहों, विशेषकर सूर्य और गुरु की अनुकूल स्थिति का होना बेहद जरूरी है। चूंकि इस अवधि में सकारात्मक ऊर्जा का अभाव रहता है, इसलिए इन चार महीनों में विवाह संस्कार पूरी तरह वर्जित माने गए हैं।

बाजारों में बढ़ी हलचल और बुकिंग फुल:

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शादियों का सीजन अपने अंतिम पड़ाव पर होने के कारण इस समय बाजारों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में भारी व्यस्तता देखी जा रही है। एकसाथ आए मुहूर्तों के लिए शहर के मैरिज गार्डन, मैरिज हॉल, कैटरिंग सेवा, बैंड-बाजा और सजावट करने वाले वेंडर्स लगभग बुक हैं।

भगवान विष्णु की योगनिद्रा और नवंबर में वापसी:

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में जाते हैं। सभी मांगलिक कार्यों को रोक दिया जाता है। चार महीने बाद कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन देवउठनी एकादशी को भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागेंगे। नवंबर में आने वाली इस एकादशी पर तुलसी-शालिग्राम विवाह होगा और उसके बाद देश भर में विवाह और अन्य शुभ कार्यों का नया दौर एक बार फिर धूमधाम से शुरू होगा।

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