Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी के अलावा इन शहरों में भी निकलती है भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा

Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी ही नहीं, इन शहरों में भी निकलती है भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा
Jagannath Rath Yatra 2026 का इंतजार देशभर के श्रद्धालु बेसब्री से करते हैं। ज्यादातर लोग मानते हैं कि भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा केवल ओडिशा के पुरी में ही निकलती है। हालांकि, ऐसा नहीं है।

दिल्ली, गुरुग्राम, अहमदाबाद, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद समेत देश के कई शहरों में भी हर साल भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की भव्य रथयात्रा निकाली जाती है।
आइए जानते हैं कि पुरी के अलावा किन-किन शहरों में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा आयोजित होती है और इसका धार्मिक महत्व क्या है।
पुरी के अलावा कहां-कहां निकलती है जगन्नाथ रथयात्रा?
दिल्ली
राजधानी दिल्ली में हर साल भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा निकाली जाती है। यात्रा के दौरान सुंदर झांकियां सजाई जाती हैं। इसके साथ ही भजन-कीर्तन, प्रसाद वितरण और धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
गुरुग्राम
हरियाणा के गुरुग्राम में भी रथयात्रा का आयोजन लगातार लोकप्रिय हो रहा है। स्थानीय मंदिर समितियां और श्रद्धालु मिलकर इस यात्रा को सफल बनाते हैं। इस दौरान भक्त भगवान के रथ को खींचने का सौभाग्य भी प्राप्त करते हैं।
अहमदाबाद
गुजरात के अहमदाबाद की जगन्नाथ रथयात्रा देश की सबसे प्रसिद्ध यात्राओं में गिनी जाती है। इस यात्रा में हाथी, ऊंट, अखाड़े, पारंपरिक झांकियां और हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। प्रशासन भी सुरक्षा के व्यापक इंतजाम करता है।
कोलकाता
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में भी भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का विशेष महत्व है। यहां कई मंदिरों से शोभायात्रा निकाली जाती है। पूरे मार्ग में भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण का आयोजन होता है।
मुंबई
मुंबई में रहने वाले ओडिशा और पूर्वी भारत के लोगों के साथ-साथ अन्य श्रद्धालु भी इस रथयात्रा में भाग लेते हैं। शहर के कई मंदिर और धार्मिक संगठन इस आयोजन का नेतृत्व करते हैं।
बेंगलुरु और हैदराबाद
दक्षिण भारत के बेंगलुरु और हैदराबाद में भी हर साल श्रद्धा और उत्साह के साथ भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जाती है। यहां पूजा, भजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम पूरे माहौल को भक्तिमय बना देते हैं।
भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा क्यों निकाली जाती है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान जगन्नाथ हर वर्ष अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ अपनी मौसी गुंडिचा देवी के मंदिर जाते हैं।
कुछ दिन वहां विश्राम करने के बाद भगवान बहुदा यात्रा के जरिए श्रीमंदिर लौटते हैं। इसी परंपरा को जगन्नाथ रथयात्रा कहा जाता है।
एक अन्य मान्यता के अनुसार, भगवान इस दिन मंदिर से बाहर आकर उन भक्तों को दर्शन देते हैं, जो किसी कारण मंदिर नहीं पहुंच पाते।
जगन्नाथ रथयात्रा का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में जगन्नाथ रथयात्रा को भगवान और भक्त के मिलन का पर्व माना जाता है।
मान्यता है कि—
- रथ के दर्शन करने से पुण्य मिलता है।
- रथ की रस्सी खींचना बेहद शुभ माना जाता है।
- भगवान इस दिन स्वयं भक्तों के बीच आते हैं।
- लाखों श्रद्धालु इस पावन यात्रा में शामिल होते हैं।
Jagannath Rath Yatra 2026 की खास बातें
- रथयात्रा की तिथि: 16 जुलाई 2026
- भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के तीन रथ निकाले जाते हैं।
- पुरी के अलावा कई राज्यों में भी भव्य आयोजन होता है।
- लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से यात्रा में शामिल होते हैं।
- रथ की रस्सी खींचना शुभ और पुण्यदायी माना जाता है।
FAQs
Q1. Jagannath Rath Yatra 2026 कब है?
उत्तर: भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा 16 जुलाई 2026 को निकाली जाएगी।
Q2. पुरी के अलावा किन शहरों में रथयात्रा निकलती है?
उत्तर: दिल्ली, गुरुग्राम, अहमदाबाद, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद समेत कई शहरों में।
Q3. जगन्नाथ रथयात्रा का धार्मिक महत्व क्या है?
उत्तर: मान्यता है कि रथ के दर्शन करने और उसकी रस्सी खींचने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
Q4. रथयात्रा में भगवान किनके साथ निकलते हैं?
उत्तर: भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथयात्रा पर निकलते हैं
।









